Title: आत्मानुभूति के महत्वपूर्ण उद्धरण
धर्म एक आत्मानुभूति का अनुभव है, न कि एक वैदिक शास्त्रों का अध्ययन। – स्वामी विवेकानंद
जब आप पीछे की ओर देखते हैं, आप अपनी गतिविधियों से पीछे रह जाते हैं। जब आप भविष्य की ओर देखते हैं, आप आपकी उत्पत्ति से असंतुष्ट हो जाते हैं। जो कुछ आपके सामने है, उस से उत्साह लें और सेवा करें। – स्वामी रामदास
शुद्ध मस्तिष्क सिर्फ एवं सिर्फ परमात्मा की ही ओर भगति करता है। – श्रीरामकृष्ण परमहंस
एक आदमी इसलिए कमजोर होता है क्योंकि वह अपने आप को कमजोर मानता है। वह इतना दर्द सहता है क्योंकि वह अपने प्रभाव में है। जब हम अपनी स्थिति को बदलते हैं, तो हम जीवन को भी बदल डालते हैं। – महात्मा गांधी
जिस भी मार्ग से आप भगवान के पास पहुंचें, आपको उसे निभाना चाहिए। – माता अमृतानंदमयी
जीवन में कर्तव्य करना मेरे दृष्टिकोण से भगवान की उपस्थिति है। – लाओ त्से
अपने जीवन को उच्चतम कट्टरता से जीने का क्रम है – स्वामी विवेकानंद
सुख अभेद ऊर्जा का नाम है। प्रेम भी ऊर्जा का ही अभिव्यक्ति होता है। – स्वामी रामदास
कुछ लोग धर्म वह चीज समझते हैं जो उन्हें पैसों और शोहरत से भरता है। धर्म वह है जो आपको भविष्य में सुख देता है, चाहे इस जीवन में या अगले। – स्वामी विवेकानंद
धर्म उसके स्वभाव के आधार पर मूल्यांकन की जाती है, न कि उसकी दौलत और संपत्ति के आधार पर। – स्वामी रामदास
अगर आप खुश नहीं हैं, तो आप दूसरों की मदद करें। इससे आपका खुशी का स्तर बढ़ा होगा। – मदर टेरेसा
एक चैंपियन हमेशा अच्छे को बेहतर बनाने का अभ्यास करता है, लेकिन एक योगी जीवन के हर पहलू का लाभ उठाता है। – भगवान श्रीकृष्ण
आपके मन में कुछ भी हो सकता है। इसलिए, अपने मन को उतना ही शुद्ध और सात्त्विक बनाएं जितना आप खाने में शुद्ध और सात्त्विक खाने की तरह ध्यान देते हैं। – स्वामी विवेकानंद
उस समय दुःख और दुविधा से निपटने के लिए अपनी भक्ति को अपने प्रियतम से गहरी बनाए रखें. – भगवान श्रीकृष्ण
उन महान लोगों में से एक थे जिन्होंने अपने जीवन में कभी खुद को नहीं देखा था, बल्कि उन्होंने हमेशा अपने नैतिक मूल्यों और धर्म के मार्ग पर चलने का काम किया था। – महात्मा गांधी
आत्मा कभी भी नाश नहीं होती। यह केवल वस्तुओं की तरह अनादि से ही हैं और कभी न मरती हैं। – भगवान श्रीकृष्ण
आसक्ति से रहित और स्पष्ट दृष्टिकोण वाले व्यक्ति किसी भी कार्य में सफल होते हैं। – श्रीरामकृष्ण परमहंस
धर्म मनुष्य को और जीवित करता है, तो व्यक्तित्व उसकी व्यापकता के अनुसार विकसित होता है। – स्वामी रामदास
लेखक के मतों से यहाँ निर्देशित भाव एवं वाक्य नहीं हैं दरअसल इस लेख के माध्यम से बताने का उद्देश्य था कि धार्मिक महान व्यक्तियों के अनमोल विचार हमारे जीवन को समृद्ध बनाने में मदद कर सकते हैं। ये विचार हमको हमारे कर्मों की महत्वपूर्णता को जानने के लिए प्रेरित करते हैं।