न्याय की कसौटी और बीरबल का दिल
एक बेबस पिता की गुहार शहंशाह अकबर के दरबार में वैसे तो हर रोज न्याय के कई मामले आते थे, लेकिन आज का दिन कुछ अलग था। दरबार के बीचों-बीच रामदीन नाम का एक बूढ़ा और बेहद गरीब लकड़हारा फूट-फूट… Continue Reading
एक बेबस पिता की गुहार शहंशाह अकबर के दरबार में वैसे तो हर रोज न्याय के कई मामले आते थे, लेकिन आज का दिन कुछ अलग था। दरबार के बीचों-बीच रामदीन नाम का एक बूढ़ा और बेहद गरीब लकड़हारा फूट-फूट… Continue Reading
नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में, जहां हर सुबह एक नया ‘महा-ज्ञान’ और हर शाम एक नई ‘वैज्ञानिक क्रांति’ जन्म लेती है। इस विश्वविद्यालय के कुलपति हमारे और आपके वही फूफा जी और मौसा जी… Continue Reading
बॉलीवुड के चमकते सितारों और करोड़ों के बजट वाली फिल्मों के बीच अक्सर वो सिनेमाई रत्न छिप जाते हैं, जो असल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ाते हैं। हाल ही में अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए मशहूर अभिनेत्री… Continue Reading
रामपुर गांव में रामलाल नाम का एक बूढ़ा कुम्हार रहता था। उसके मिट्टी के बर्तन पूरे इलाके में अपनी मजबूती और खूबसूरती के लिए मशहूर थे। रामलाल का एक बारह साल का बेटा था, राघव। राघव बचपन से ही अपने… Continue Reading
यदि आपके पास सुबह-सुबह “गुड मॉर्निंग” के साथ गुलाब के फूल पर ओस की बूंदों वाला चित्र और नीचे लिखा संदेश आता है कि “इसे ११ लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी”, तो बधाई हो! आप दुनिया के… Continue Reading
सिनेमा प्रेमियों, दिल थामकर बैठिए! ‘काक-वाणी’ आपके लिए लेकर आया है मनोरंजन जगत की एक ऐसी तीखी और सच्ची खबर, जिसने बॉलीवुड के गलियारों में खलबली मचा दी है। बॉलीवुड और साउथ सिनेमा के बजट की जंग तो सालों से… Continue Reading
बॉलीवुड और साउथ सिनेमा का मिलन इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर नए-नए रिकॉर्ड बना रहा है। अब इस लिस्ट में एक और बड़ा धमाका होने जा रहा है, जिसका नाम है ‘टॉक्सिक’ (Toxic)। कन्नड़ सुपरस्टार यश यानी हमारे प्यारे ‘रॉकी… Continue Reading
वाह! युग बदल गया, इतिहास पलट गया और हमारे भाग्य तो मानो सातवें आसमान पर पहुंच गए। देश की राजनीति में एक ऐसी अभूतपूर्व क्रांति आई है कि खुद मीडिया भी अपनी आंखें मलाई मार-मारकर मल रहा है। खबर आई… Continue Reading
एक अधूरी शाम और टूटी उम्मीदें पहाड़ों के छोटे से गाँव में शाम ढल रही थी। सत्रह साल का कबीर अपनी फटी हुई पेंटिंग को हाथ में लिए रो रहा था। उसने राज्य स्तरीय चित्रकला प्रतियोगिता में अपना सब कुछ… Continue Reading
एक लाचार पिता का आखिरी सपना रामपुर नाम के एक छोटे से गाँव में हरिप्रसाद नाम के एक वृद्ध मूर्तिकार रहते थे। उनकी बनाई मूर्तियाँ इतनी जीवंत होती थीं कि मानो वे अभी बोल उठेंगी। लेकिन समय के क्रूर चक्र… Continue Reading