बंद आँखों का रोशन चिराग: एक प्रेरणादायक कहानी

उम्मीदों की ढलती साँझ गाँव के एक शांत कोने में रामदीन नाम का एक वृद्ध कुम्हार रहता था। मिट्टी को आकार देना केवल उसका पेशा नहीं, बल्कि उसकी साँसों की लय थी। उसकी बनाई मूर्तियों में ऐसा जीवंत रूप होता… Continue Reading →

उजले रंगों की उम्मीद

सपनों का अचानक टूट जाना अमित शहर का एक मशहूर चित्रकार था। उसकी उंगलियाँ जब कैनवास पर चलती थीं, तो मानो बेजान तस्वीरों में भी जान फूँक देती थीं। चित्रकारी ही उसकी सांसें थी और रंग ही उसकी दुनिया। लेकिन… Continue Reading →

आखिर क्या है ये ‘बॉलीवुड’? दादा साहेब फाल्के के ‘साइलेंट’ दौर से ‘पैन-इंडिया’ के शोर तक की मसालेदार कहानी!

नमस्ते दोस्तों! ‘काक-वाणी’ के इस चटपटे मंच पर आपका स्वागत है। हाल ही में दुनिया की मशहूर ज्ञान-मंजूषा ‘ब्रिटानिका’ ने एक बड़ा ही दिलचस्प सवाल पूछा – ‘व्हाट इज बॉलीवुड?’ यानी यह बॉलीवुड आखिर किस चिड़िया का नाम है? अब… Continue Reading →

भारतीय लोकतंत्र में ‘निर्दयता’ का महा-उत्सव: फ्रंटलाइन रो रहा है, और हम पॉपकॉर्न खा रहे हैं!

अरे वाह! अंग्रेजी की ‘फ्रंटलाइन’ पत्रिका ने अपने महंगे और गंभीर पन्नों पर बड़ा ही क्रांतिकारी खुलासा किया है—”भारतीय लोकतंत्र और राजनैतिक निर्दयता का सामान्यीकरण”। ‘काक-वाणी’ के इस कौवे को तो यह पढ़कर इतनी ज़ोर से हंसी आई कि पेड़… Continue Reading →

मार्को रुबियो का ‘बंदरगाह’ प्रेम: क्या वाशिंगटन में समोसे खत्म हो गए थे?

वाह! बीबीसी का ज्ञानचक्षु एक बार फिर खुल गया है। खबर आई है कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो भारत के एक शांत, धूप से तपते बंदरगाह शहर में पधारे हैं। अब दुनिया भर के भू-राजनीतिक विशेषज्ञ अपना सिर खुजला… Continue Reading →

अमेरिकी विदेश मंत्री की भारतीय बंदरगाह यात्रा: क्या वाशिंगटन में चाय ठंडी हो गई थी?

अरे भइया, दुनिया के दरोगा जी यानी अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो साहब को भारत के एक बंदरगाह शहर की खाक छाननी पड़ रही है! और बीबीसी वाले अपनी चोंच में जासूसी का चश्मा लगाकर दुनिया से पूछ रहे… Continue Reading →

पंचतंत्र की अनोखी कहानी: सच्चे मित्र की अटूट निष्ठा

सुंदरवन में छाए संकट के बादल बहुत समय पहले की बात है, सुंदरवन के घने जंगल में सारंग नाम का एक सुंदर हिरण और मंथरक नाम का एक वृद्ध कछुआ रहते थे। दोनों की मित्रता इतनी गहरी थी कि जंगल… Continue Reading →

लोकतंत्र का ‘डिजिटल मोक्ष’: जब लाखों वोटरों को कागजों में ‘निपटा’ दिया गया!

नमस्कार देशवासियों! ‘काक-वाणी’ के इस व्यंग्यात्मक बुलेटिन में आपका स्वागत है। हाल ही में अमरीका के ‘एनपीआर’ (NPR) नामक मीडिया घराने ने अपनी एक रिपोर्ट में रोना रोया है कि भारत में इतिहास का सबसे बड़ा “वोटर संहार” हुआ है।… Continue Reading →

क्लेफेस स्टार टॉम रीस हारिज भी हुए बॉलीवुड के मुरीद, बोले- ‘दुनिया पर छा गया है भारतीय सिनेमा!’

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका आपके अपने चटपटे और मसालेदार एंटरटेनमेंट अड्डे ‘काक-वाणी’ पर। आज की ताजा खबर सुनकर हर भारतीय सिनेमा प्रेमी का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। अब सिर्फ हम ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार बैठे… Continue Reading →

उड़े पंखों के बिना: एक अनोखी प्रेरणादायक कहानी

टूटे हुए सपने और खामोश कैनवास छोटे से गाँव रामपुर में रहने वाला दस साल का आरव रंगों का जादूगर था। उसकी नन्हीं उंगलियाँ जब ब्रश पकड़ती थीं, तो सादे कागज पर मानो जिंदगी मुस्कुराने लगती थी। आरव का सपना… Continue Reading →