शिव पुराण ज्ञान: जीवन को बदलने वाले अनमोल सूत्र और आध्यात्मिक रहस्य

सनातन धर्म के 18 महापुराणों में शिव पुराण का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना गया है। यह ग्रंथ केवल पौराणिक कथाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा दिखाने वाला एक महान आध्यात्मिक मार्गदर्शक है। शिव पुराण… Continue Reading →

‘फॉरवर्डेड ऐज रीसीव्ड’: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के महान शोध और उनका काक-फैक्ट चेक

नमस्कार ज्ञान-पिपासुओं! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। यह दुनिया की इकलौती ऐसी यूनिवर्सिटी है, जहाँ दाखिले के लिए योग्यता की नहीं, बल्कि केवल 4G डेटा और एक चलती हुई उंगली की आवश्यकता होती है। यहाँ… Continue Reading →

ममता की जीत और बीरबल की बुद्धिमानी

शहंशाह अकबर का दरबार सजा हुआ था। सभी दरबारी अपनी-अपनी बातें रख रहे थे, तभी दरबार में एक बूढ़ी औरत बदहवास हालत में रोती हुई दाखिल हुई। उसका नाम कांति देवी था। उसके चेहरे पर अपार दुख और आंखों में… Continue Reading →

विद्या बालन का ऑस्ट्रेलिया में डंका: पर्थ के पहले इंडियन फिल्म फेस्टिवल की बनेंगी चीफ गेस्ट!

बॉलीवुड की ‘डर्टी पिक्चर’ से लेकर ‘भूल भुलैया 3’ में ‘मंजुलिका’ बनकर दर्शकों के दिलों पर राज करने वाली एक्ट्रेस विद्या बालन के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। अपनी बेहतरीन अदाकारी से हिंदी सिनेमा को नई ऊंचाइयों… Continue Reading →

सकारात्मक चिंतन और ध्यान: शांति और सफलता की दिव्य कुंजी

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और नकारात्मकता इंसान के मानसिक स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। ऐसे में सकारात्मक चिंतन और ध्यान दो ऐसे दिव्य शस्त्र हैं, जो हमारे जीवन को सकारात्मक दिशा में पूरी… Continue Reading →

‘अल जजीरा’ की दिव्य दृष्टि: भारत का असली राष्ट्रीय खेल ‘हॉकी’ नहीं, ‘धरना’ है!

नमस्कार दोस्तों! ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में आपका स्वागत है। हाल ही में कतर के प्रख्यात समाचार संस्थान ‘अल जजीरा’ को अचानक भारत पर अत्यंत प्रेम उमड़ आया है। उन्होंने एक गम्भीर शोध पत्र प्रस्तुत किया है, जिसका सार… Continue Reading →

नाना पाटेकर: जब ‘ग्रे शेड’ बना असली हीरो, फ्रंटलाइन की रिपोर्ट पर ‘काक-वाणी’ का कड़क पंच!

हाल ही में मशहूर ‘फ्रंटलाइन मैगजीन’ ने भारतीय सिनेमा में ‘एंटी-हीरो’ के दौर और नाना पाटेकर के योगदान पर एक बेहद दिलचस्प लेख छापा है। जब भी बॉलीवुड में बिना किसी चिकनी-चुपड़ी बातों और बिना किसी फैंसी डांस के, सिर्फ… Continue Reading →

सरकार से पूछकर विरोध का अधिकार? मतलब, डाकू से पूछकर घर में ताला लगाना!

अरे वाह! ‘फ्रंटलाइन’ पत्रिका ने क्या अद्भुत खोज की है! उन्होंने बड़ी गंभीरता से फरमाया है कि भारत में विरोध प्रदर्शन का अधिकार सरकार की दया या अनुमति पर निर्भर नहीं होना चाहिए। मतलब हद है भाई! अब क्या जनता… Continue Reading →

नाना पाटेकर: ‘एंटी-हीरो’ के असली उस्ताद, जिनके सामने आज के ‘रफ़ हीरो’ पानी भरते हैं!

जब बॉलीवुड में हीरो सफ़ेद कुर्ता पहनकर और माथे पर तिलक लगाकर केवल अच्छाई का ढोल पीटते थे, तब एक बंदा आया जिसके चेहरे पर कोई दिखावटी चमक नहीं थी, लेकिन आंखों में ऐसा गुस्सा था जो सीधे पर्दे को… Continue Reading →

टूटे पंखों की नई उड़ान

रात का गहरा अंधेरा छाया हुआ था। नदी के किनारे बैठा चौबीस साल का आदित्य अपनी आंखों से आंसू पोंछ रहा था। उसने अपने जीवन के लगातार तीन साल एक बड़ी परीक्षा की तैयारी में लगा दिए थे, लेकिन आज… Continue Reading →