बॉलीवुड स्टार के पैर छूते ही उड़ गए अमेरिकियों के होश! सबीर भाटिया ने बयां किया भारत का ‘अंधविश्वास’

भारत में बॉलीवुड सितारों की दीवानगी किसी से छिपी नहीं है। यहाँ एक्टर सिर्फ कलाकार नहीं, बल्कि ‘भगवान’ का दर्जा पा जाते हैं। लेकिन क्या यह दीवानगी कभी-कभी कुछ ज़्यादा ही हो जाती है? इसी विषय पर हॉटमेल (Hotmail) के को-फाउंडर सबीर भाटिया ने एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।

जब अमेरिकी मेहमानों का खुला रह गया मुंह!

हाल ही में एक इंटरव्यू में सबीर भाटिया ने एक बेहद दिलचस्प और आंखें खोलने वाला किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि एक बार वे भारत में अपने कुछ अमेरिकी दोस्तों और मेहमानों के साथ एक कार्यक्रम में थे। तभी वहां एक मशहूर बॉलीवुड स्टार की एंट्री हुई। स्टार को देखते ही वहां मौजूद होटल या इवेंट स्टाफ के एक सदस्य ने तुरंत आगे बढ़कर उस स्टार के पैर छू लिए।

यह नजारा देखकर सबीर भाटिया के अमेरिकी मेहमान पूरी तरह सन्न रह गए। उनके लिए यह बात हजम करना बेहद मुश्किल था कि कोई काम करने वाला व्यक्ति किसी फिल्म स्टार के पैरों में इस तरह गिर सकता है। अमेरिका में सेलिब्रिटीज को पसंद किया जाता है, उनके साथ तस्वीरें ली जाती हैं, लेकिन उन्हें ‘भगवान’ की तरह पूजने का कोई रिवाज नहीं है।

‘सेलेब्रिटी वर्शिप’ या अंधभक्ति? सबीर भाटिया का तीखा सवाल

सबीर भाटिया ने इस घटना का जिक्र करते हुए भारत में बढ़ते ‘सेलेब्रिटी वर्शिप’ (Celebrity Worship) यानी सितारों की अंधभक्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में लोग काम की कद्र करते हैं, इंसान की पूजा नहीं। सिलिकॉन वैली में स्टीव जॉब्स या एलन मस्क जैसे दिग्गजों को भी लोग आम इंसान की तरह ही ट्रीट करते हैं। वहां कोई किसी के पैर नहीं छूता और न ही उन्हें भगवान मानता है।

भाटिया का मानना है कि भारत में जब तक हम कलाकारों और खिलाड़ियों को सामान्य इंसान के रूप में देखना शुरू नहीं करेंगे, तब तक हम एक व्यावहारिक समाज नहीं बन पाएंगे। पैर छूना हमारी संस्कृति में बुजुर्गों के सम्मान का प्रतीक है, लेकिन किसी स्टार के सामने इस तरह झुकना अमेरिकी मेहमानों को ‘सामंतवादी सोच’ का हिस्सा लगा।

काक-वाणी का नजरिया: सम्मान और गुलामी के बीच की महीन रेखा

अब बात करते हैं हमारी यानी ‘काक-वाणी’ की। हमारे देश में ‘चरण स्पर्श’ को सबसे बड़ा संस्कार माना जाता है। लेकिन जब यह संस्कार किसी रील-लाइफ हीरो के लिए अंधभक्ति में बदल जाए, तो सवाल उठना लाजिमी है। क्या सच में हमारे देश में टैलेंट से ज्यादा ‘स्टारडम’ की पूजा होती है? सबीर भाटिया की यह बात सोचने पर मजबूर जरूर करती है। अगली बार जब आप अपने पसंदीदा स्टार को देखें, तो ऑटोग्राफ मांगें, सेल्फी लें, लेकिन खुद को उनके पैरों में न गिराएं!


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कागा जी