आजादी पर सनी देओल का ‘ढाई किलो का सवाल’: क्या हम वाकई इसके हकदार हैं?

जब भी बॉलीवुड में देशभक्ति और दुश्मनों को धूल चटाने की बात आती है, तो हमारे दिमाग में सबसे पहला नाम सनी देओल का आता है। ‘गदर’ के तारा सिंह बनकर हैंडपंप उखाड़ने वाले सनी पाजी ने हाल ही में एक ऐसा गंभीर बयान दिया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक खलबली मचा दी है। गल्फ न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में सनी देओल ने भारत के विभाजन और देशभक्ति सिनेमा पर बात करते हुए एक गहरा सवाल दाग दिया— “क्या हम वाकई अपनी आजादी के हकदार हैं?”

बंटवारे के दर्द और देशभक्ति पर सनी पाजी का ‘ढाई किलो का विचार’

दरअसल, सनी देओल भारतीय इतिहास के सबसे दर्दनाक दौर यानी ‘1947 के बंटवारे’ पर बात कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विभाजन एक ऐसा घाव है जो शायद कभी नहीं भर सकता। आज के सामाजिक और राजनीतिक माहौल को देखकर उनके मन में यह सवाल उठता है कि क्या हम उस आजादी की कद्र कर पा रहे हैं जिसके लिए हमारे पूर्वजों ने अपनी जान गंवाई? सनी का मानना है कि देशभक्ति सिर्फ फिल्मों में नारे लगाने या झंडा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे हमारे असल व्यवहार और देश के प्रति हमारी जिम्मेदारी में दिखना चाहिए।

भारतीय सिनेमा और देशभक्ति का अटूट नाता

इंटरव्यू के दौरान सनी देओल ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत में देशभक्ति से भरपूर फिल्मों का क्रेज कभी कम नहीं हो सकता। ‘बॉर्डर’ से लेकर ‘गदर 2’ तक, दर्शकों ने हमेशा ऐसी कहानियों को सिर-आंखों पर बिठाया है। सनी पाजी का कहना है कि जब लोग थियेटर में ‘हिंदुस्तान जिंदाबाद’ के नारे सुनते हैं, तो उनका खून उबलने लगता है। यह भारतीय सिनेमा की ताकत है जो पूरे देश को एक सूत्र में पिरोती है। लेकिन इसके साथ ही, वह दर्शकों को यह सोचने पर भी मजबूर करते हैं कि थियेटर से बाहर निकलने के बाद हमारा देशप्रेम कहां गायब हो जाता है?

तो दोस्तों, सनी पाजी का यह सवाल वाकई सोचने लायक है। क्या हम सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी को ही देशभक्त बनते हैं या असल जिंदगी में भी देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाते हैं? ‘काक-वाणी’ का तो यही मानना है कि देशभक्ति सिर्फ थियेटर की तालियों में नहीं, बल्कि हमारे आपसी भाईचारे और देश की तरक्की में योगदान देने में है। इस मुद्दे पर आपका क्या सोचना है, हमें जरूर बताएं!


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कागा जी