उज्बेकिस्तान की हसीन वादियों में ‘विश्वगुरु’ का डेरा: जब SCO शिखर सम्मेलन बहाना हो और उड़ना ही असली निशाना हो!

नमस्कार पाठकों! ‘काक-वाणी’ के इस विशेष बुलेटिन में आपका स्वागत है। हमारे देश के परम पूज्य, अथक यात्री और पार्ट-टाइम भारत निवासी, श्री नरेंद्र मोदी जी एक बार फिर उड़ान भर चुके हैं। इस बार उनका विमान उज्बेकिस्तान की ऐतिहासिक धरती समरकंद में उतरा है। बहाना तो SCO (शंघाई सहयोग संगठन) शिखर सम्मेलन का है, लेकिन असली मकसद तो आप जानते ही हैं – दिल्ली की उमस और राजनीतिक सिरदर्दी से थोड़ी राहत पाना और अपने कीमती पासपोर्ट पर एक नया स्टैम्प लगवाना। आखिरकार, ‘विश्वगुरु’ घर पर खाली बैठे अच्छे थोड़े ही लगते हैं!

कैमरों की चकाचौंध और ‘लाल आंख’ का डिप्लोमैटिक तमाशा

जैसे ही प्रधानमंत्री का विमान समरकंद की धरती पर उतरा, हमारे भारतीय मुख्यधारा मीडिया के कैमरों के लेंस स्वतः ही चौड़े हो गए। स्टूडियो में बैठे एंकरों की आवाज में वही पुराना रोमांच लौट आया है— “देखिए, मोदी जी ने उज्बेकिस्तान की धरती पर कदम रखते ही कैसे इतिहास रच दिया!” अब वहां चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री भी मौजूद होंगे। हमारे राष्ट्रवादी दर्शक टीवी स्क्रीन से आंखें चिपकाए बैठे हैं कि कब मोदी जी अपनी मशहूर ‘लाल आंखें’ निकालकर शी जिनपिंग को डराएंगे, या फिर कब शहबाज शरीफ को सिर्फ एक तीखी मुस्कान से पानी-पानी कर देंगे। कूटनीति का ऐसा लाइव-थ्रिलर सिनेमाघरों में भी देखने को नहीं मिलता!

समरकंद का पुलाव और विश्व कल्याण की चिंता

दावा किया जा रहा है कि इस सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और आतंकवाद पर बड़ी-बड़ी चर्चाएं होंगी। लेकिन काक-वाणी के गुप्त सूत्रों के अनुसार, असली चर्चा इस बात पर होगी कि समरकंद की पुलाव-बिरयानी का स्वाद बेहतर है या फिर दिल्ली की राजनीतिक खिचड़ी का। जब पूरा देश महंगाई, बेरोजगारी और रुपये की गिरती सेहत की चिंता में डूबा है, तब हमारे प्रधान सेवक सात समंदर पार (या कहें कि मध्य एशिया में) बैठकर वैश्विक कल्याण की चिंता कर रहे हैं। इसे ही तो कहते हैं असली ‘वसुधैव कुटुंबकम’—चाहे अपना घर खाली हो, लेकिन पड़ोसी के घर की खुशहाली की चिंता सबसे पहले होनी चाहिए।

तो साथियों, आइए हम सब मिलकर टीवी स्क्रीन के सामने बैठें, उज्बेकिस्तान के खूबसूरत नजारों का आनंद लें और तालियां बजाएं। आखिर जब तक विदेश की धरती पर भारत का ‘डंका’ बजता रहेगा, तब तक देश के भीतर की हर समस्या खुद-ब-खुद छोटी नजर आती रहेगी। ‘काक-वाणी’ की तरफ से प्रधानमंत्री जी को इस सुखद पर्यटन… क्षमा करें, इस अत्यंत महत्वपूर्ण ‘शिखर सम्मेलन’ के लिए ढेरों शुभकामनाएं!


संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें

कागा जी