देश के महान राजनीतिक थिएटर में आपका स्वागत है। ‘काक-वाणी’ के सभी बुद्धिजीवी और मूंगफली चबाते पाठकों को सूचित किया जाता है कि हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था ने एक और विकट संकट को सफलतापूर्वक टाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया ‘DW’ की चमचमाती खबर के अनुसार, CJP के प्रखर नेता अभीजीत दीपके को पुलिस हिरासत से अंततः ‘रिहा’ कर दिया गया है। देशवासियों, राहत की सांस लीजिए! जिस नेता की उपमा जीवविज्ञान के सबसे जिद्दी जीव ‘काकरोच’ से जुड़ी हो, उसे पुलिस की कुछ घंटों की हिरासत भला कैसे समाप्त कर सकती थी?
परमाणु हमले में भी सुरक्षित रहने वाली क्रांति
वैज्ञानिकों का दावा है कि अगर पृथ्वी पर कोई भयानक परमाणु हमला हो जाए, तो केवल काकरोच ही जीवित बचेंगे। भारतीय राजनीति में हमारे जुझारू नेताओं की प्रतिरोधक क्षमता भी ठीक ऐसी ही है। सरकारें आती हैं, कड़े कानून रूपी हिट (Hit) या बेगौन (Baygon) का छिड़काव करती हैं, पुलिस की वैन का सायरन बजाती हैं, लेकिन ये राजनीतिक योद्धा हर बार हिरासत से ऐसे बाहर आते हैं मानो किसी लक्जरी स्पा से डिटॉक्स होकर लौटे हों।
अभीजीत दीपके की इस ‘दुखद हिरासत’ और ‘गौरवशाली रिहाई’ ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि हमारे देश में पुलिस थाना दरअसल नेताओं के लिए मुफ्त के ‘प्रचार केंद्र’ का काम करता है। कोई आम नागरिक गलती से भी थाने चला जाए तो उसकी रीढ़ की हड्डी मोमबत्ती की तरह पिघल जाती है, लेकिन जब कोई नेताजी वैन में बैठते हैं, तो खिड़की से हाथ ऐसे हिलाते हैं जैसे ऑस्कर अवॉर्ड लेने जा रहे हों।
अंतरराष्ट्रीय मातम और सोशल मीडिया का विक्टिम कार्ड
विदेशी मीडिया संस्थान ‘DW’ को भी इस मामले में लोकतंत्र के पतन की गूंज सुनाई दे गई। बेचारों को क्या पता कि भारत में पुलिस हिरासत अब कोई सजा नहीं, बल्कि युवा नेताओं के बायोडाटा (CV) में जुड़ने वाला एक अनिवार्य ‘एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट’ है। जब तक किसी नेता के नाम के आगे ‘पूर्व हिरासत-प्राप्त’ न लिखा हो, तब तक राजनीति के बाजार में उसकी टीआरपी नहीं बढ़ती।
इस पूरे ड्रामे में सबसे गंभीर नुकसान केवल दो ही चीजों का हुआ है—पहला, सरकारी चाय का और दूसरा, आम जनता के इंटरनेट डाटा का। रिहाई के बाद अब दीपके जी का अगला कदम निश्चित रूप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करना होगा, जहां वह विस्तार से बताएंगे कि कैसे उन्होंने थाने के लॉकअप में मच्छर काटते वक्त भी देश सेवा का संकल्प नहीं छोड़ा। ‘काक-वाणी’ का सलाम है ऐसे अनश्वर नेताओं को, जो राजनीति के हर कीटनाशक को हजम करने का हुनर जानते हैं!
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