काक-वाणी: एक्टर नानी ने ‘पैन-इंडिया’ टैग की खोली पोल, बोले- ये कैसा नया ड्रामा है भाई?

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका आपके पसंदीदा गलियारे ‘काक-वाणी’ में, जहाँ हम लाते हैं बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की हर तीखी-मीठी खबर, बिल्कुल ‘कौवे की पैनी नजर’ से। आजकल सिनेमा जगत में एक नया भूत सिर चढ़कर बोल रहा है, और उस भूत का नाम है – ‘पैन-इंडिया’ (Pan-India)। कोई भी फिल्म हो, चार भाषाओं में डब हुई नहीं कि मेकर्स छाती ठोककर चिल्लाने लगते हैं, “हमारी फिल्म पैन-इंडिया है!” लेकिन अब साउथ के ‘नेचुरल स्टार’ नानी ने इस गुब्बारे में सुई चुभो दी है और पूछा है कि भाई, ये क्या तमाशा है?

नानी का सीधा वार: ‘पैन-इंडिया’ क्या कोई ब्रांड है?

हाल ही में एक मीडिया बातचीत के दौरान जब नानी से इस ‘पैन-इंडिया’ टैग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी लाग-लपेट के अपने दिल की बात कह दी। नानी ने सवाल उठाया कि आखिर फिल्मों को इस तरह के डिब्बों में क्यों बंद किया जा रहा है? उनके मुताबिक, एक अच्छी फिल्म हमेशा पूरे देश की होती है, उसे किसी खास टैग की जरूरत नहीं होती। नानी का कहना है कि अगर कहानी में दम है, तो दर्शक उसे खुद-ब-खुद ढूंढ लेंगे, फिर चाहे वो किसी भी भाषा या बजट की हो। फिल्म को जबरन ‘पैन-इंडिया’ कहकर बेचना दर्शकों की समझ का अपमान करने जैसा है।

फिल्म अच्छी होनी चाहिए, टैग नहीं!

नानी ने बहुत ही पते की बात कही है कि आजकल मेकर्स कहानी से ज्यादा मार्केटिंग और ढिंढोरा पीटने पर ध्यान दे रहे हैं। फिल्म का बजट चाहे जितना भी हो, उसे ‘पैन-इंडिया’ घोषित करके दर्शकों पर थोपने की कोशिश की जाती है। ‘दसरा’ और ‘हाय नन्ना’ जैसी फिल्मों से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले नानी का मानना है कि फिल्मों को भाषा के आधार पर बांटने के बजाय, उनकी आत्मा यानी कंटेंट पर ध्यान देना चाहिए। आखिरकार, कांतारा और पुष्पा जैसी फिल्मों ने बिना किसी पूर्व घोषित ‘पैन-इंडिया’ दावों के ही पूरे भारत में तहलका मचाया था ना!

काक-वाणी का नजरिया: क्या थम जाएगा ये भेड़चाल?

अब बात पते की ये है कि नानी की इस बेबाकी पर बॉलीवुड से लेकर टॉलीवुड तक खलबली मच गई है। जहाँ कुछ निर्माता इसे नानी का बड़बोलापन कह रहे हैं, वहीं समझदार सिनेमाप्रेमी उनकी इस बात से सौ प्रतिशत सहमत हैं। सच तो ये है कि दर्शकों को अब ‘पैन-इंडिया’ का चमकीला लेबल नहीं, बल्कि एक ‘पैन-इंटेलीजेंट’ कहानी चाहिए। अब देखना दिलचस्प होगा कि नानी के इस कड़े बयान के बाद क्या फिल्ममेकर्स अपनी फिल्मों को जबरन ‘मल्टी-लैंग्वेज धमाका’ बताना बंद करेंगे या ये भेड़चाल ऐसे ही चलती रहेगी। आपका इस बारे में क्या सोचना है? काक-वाणी के कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं!


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कागा जी