ट्रंप की ‘मिडटर्म’ पलटी और भारत का ‘रिसेट’ बटन: काक-वाणी की विशेष रिपोर्ट

वाशिंगटन की छींक और दिल्ली का जुकाम

सुप्रभात, विश्वगुरु के देशवासियों! एक बार फिर हमारे विदेश नीति के ‘महान आचार्यों’ को अपनी कुर्सियों के हत्थे कसकर पकड़ने पड़े हैं। वाशिंगटन से हवा का रुख बदलते ही खबर आई है कि डोनाल्ड ट्रंप महाराज के ‘मिडटर्म’ के गणित बिगड़ रहे हैं और अमेरिकी राजनीति की बिसात पर मोहरे फिर से खिसक रहे हैं। अब बेचारे भारतीय कूटनीतिज्ञ क्या करें? वे तो बस ‘हाउडी मोदी’ से लेकर ‘नमस्ते ट्रंप’ तक के पुराने फोटो एलबम समेटने और नए अमेरिकी मिजाज के हिसाब से अपने ‘रिसेट’ बटन पर उंगलियां सेट करने में व्यस्त हो गए हैं।

वैसे, अमेरिका में जब भी कोई नेता चुनाव हारता या जीतता है, हमारे देश के टीवी चैनलों की टीआरपी और साउथ ब्लॉक के अफसरों की ग्रीन टी की खपत अचानक बढ़ जाती है। अब जब ट्रंप साहब की राजनीतिक नैया में थोड़े सुराख दिख रहे हैं, तो हमारे एक्सपर्ट्स ने भी तुरंत ज्ञान की गंगा बहानी शुरू कर दी है। “अरे साहब, यह तो हमारी पहले से तय रणनीति का हिस्सा था!”—यह वो कालजयी जुमला है जिसे हर अमेरिकी झटके के बाद बड़ी ही सफाई से चिपका दिया जाता है।

फोटो फ्रेम बदलो, नीतियां अपने आप बदल जाएंगी

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सीधा सा नियम है—उगते सूरज को सलाम और ढलते ट्रंप से थोड़ा फासला! कल तक जो विश्लेषक ‘डोनाल्ड भैया’ के साथ भारत की अमर दोस्ती का ढोल पीट रहे थे, वे आज अचानक बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) और रणनीतिक स्वायत्तता की मोटी-मोटी किताबें खोलकर बैठ गए हैं। हमारी विदेश नीति भी किसी पुराने कंप्यूटर की तरह हो गई है, जिसे हर दो साल में वाशिंगटन के मूड के हिसाब से ‘कंट्रोल+ऑल्ट+डिलीट’ करना पड़ता है। कभी ‘टैरिफ’ का रिसेट, कभी ‘वीजा’ का रिसेट, तो कभी सीधे ‘दोस्ती’ का ही रिसेट!

अमेरिका अपनी घरेलू राजनीति में चाहे जितना भी रायता फैलाए, उसे चाटकर समेटने की नैतिक जिम्मेदारी हमारी कूटनीति की ही बन जाती है। अब जब ट्रंप का मिडटर्म वाला जादू थोड़ा फीका पड़ रहा है, तो हमारे रणनीतिकार वाशिंगटन के नए शक्ति-केंद्रों की परिक्रमा का नक्शा तैयार कर रहे होंगे। आखिर “वसुधैव कुटुंबकम” का व्यावहारिक अर्थ यही तो है कि अमेरिका में जिसकी भी लाठी चले, भैंस अपनी तरफ हांकने के लिए रणनीति को तुरंत री-बूट कर लिया जाए!

खैर, आम जनता को घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। ट्रंप हारें या जीतें, हमारे देश का एंकर वर्ग शाम आठ बजे की डिबेट में यह साबित कर ही देगा कि वाशिंगटन का यह नया रीसेट भी असल में भारत का ही एक बहुत बड़ा ‘ग्लोबल मास्टरस्ट्रोक’ है। तो बस, पॉपकॉर्न उठाइए और कूटनीति के इस नए ‘रिसेट’ ड्रामा का आनंद लीजिए!


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कागा जी