तापसी पन्नू का दर्शकों को कड़ा संदेश: आइटम नंबर्स पर सीटियां बजाना बंद करो, तभी बदलेगा सिनेमा!

बॉलीवुड की ‘बेबाक बेगम’ यानी हमारी अपनी तापसी पन्नू एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपनी दमदार एक्टिंग और हाजिरजवाबी के लिए मशहूर तापसी ने इस बार एक बेहद गंभीर मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की है। मुद्दा है फिल्मों में महिलाओं का ‘ऑब्जेक्टिफिकेशन’ (वस्तुकरण) यानी उन्हें सिर्फ एक शो-पीस की तरह दिखाना। लेकिन ठहरिए, इस बार तापसी ने सिर्फ मेकर्स को नहीं, बल्कि सीधे दर्शकों को कटघरे में खड़ा किया है!

‘ताली दोनों हाथों से बजती है दोस्त!’ – तापसी की दोटूक बात

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, Taapsee Pannu ने साफ कहा है कि जब तक दर्शक अपनी पसंद नहीं बदलेंगे, तब तक पर्दे पर महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई करना बंद नहीं होगा। तापसी का मानना है कि सिनेमा समाज का आईना होता है, और फिल्ममेकर्स वही बनाते हैं जो बिकता है। अगर दर्शक आइटम नंबर्स और फिजूल के अंग-प्रदर्शन पर सीटियां बजाना बंद कर दें, तो मेकर्स को भी अपनी सोच बदलनी पड़ेगी।

काक-वाणी के गलियारों में तापसी की इस बात पर काफी चर्चा हो रही है। तापसी ने कहा, “हम सिर्फ मेकर्स को दोष नहीं दे सकते। दर्शक ही सिनेमा का असली राजा हैं। अगर आप किसी फिल्म में महिला को गलत तरीके से पेश करने पर टिकट खरीदना बंद कर देंगे, तो कल से वैसी फिल्में बनना अपने आप बंद हो जाएंगी।” बात तो सौ फीसदी सच है, क्यों दोस्तों?

हसीना मान जाएगी, लेकिन दर्शक कब सुधरेंगे?

तापसी पन्नू हमेशा से लीक से हटकर फिल्में करने के लिए जानी जाती हैं। ‘पिंक’, ‘थप्पड़’ और ‘हसीन दिलरुबा’ जैसी फिल्मों से उन्होंने साबित किया है कि वो पर्दे पर सिर्फ ‘ग्लैमर’ का तड़का लगाने के लिए नहीं हैं। उनका कहना है कि बदलाव की शुरुआत खुद दर्शकों के रिमोट कंट्रोल और सिनेमाघर की सीट से होनी चाहिए। जब तक घटिया कंटेंट को ‘हाउसफुल’ का बोर्ड मिलता रहेगा, तब तक बदलाव की उम्मीद करना बेमानी है।

तो भैया, ‘काक-वाणी’ की तरफ से हम बस यही कहेंगे कि तापसी की इस कड़वी घूंट में समझदारी की मिठास है। अब देखना यह है कि क्या दर्शक उनकी इस अपील को गंभीरता से लेते हैं या फिर सिर्फ सोशल मीडिया पर ज्ञान बांटकर सिनेमाघरों में फिर वही पुराना घिसा-पिटा मसाला देखने चले जाते हैं। आपकी इस बारे में क्या राय है? हमें जरूर बताएं!


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कागा जी