दिल्ली के मौसम में अचानक सियासी पारा चढ़ गया है, लेकिन यह मौसम की मेहरबानी नहीं, बल्कि देश के सबसे बड़े राजनीतिक ‘रियलिटी शो’ का नतीजा है। ‘इंडी’ (INDIA) गठबंधन ने ऐलान किया है कि वे दिल्ली में एक ऐसी महा-रैली करने जा रहे हैं, जिसकी गूँज से शायद पड़ोसी ग्रहों के निवासी भी जाग उठेंगे। अखबारों में छपा है कि इस रैली में ‘दस लाख’ लोगों के आने की उम्मीद है। जी हां, पूरे दस लाख! अब यह बात अलग है कि इस आंकड़े में कार्यकर्ताओं से ज्यादा वो बेबस राहगीर शामिल हो सकते हैं, जो सिर्फ ट्रैफिक जाम में फंसकर घंटे भर तक मुफ्त का भाषण सुनने के लिए मजबूर होंगे।
दावों का हिमालय और यथार्थ की गहराई
गठबंधन के रणनीतिकारों का मानना है कि जब दस लाख लोग एक साथ हुंकार भरेंगे, तो सत्ता के गलियारे हिल उठेंगे। लेकिन ‘काक-वाणी’ का तजुर्बा कहता है कि मंच पर बैठने वाले दिग्गज नेताओं की संख्या शायद मंच के सामने बैठे असली श्रोताओं से ज्यादा ही नजर आएगी। गठबंधन की ‘अभूतपूर्व एकता’ का नजारा भी देखने लायक होगा; एक ही मंच पर कम से कम एक दर्जन ऐसे ‘भावी प्रधानमंत्री’ विराजमान होंगे, जो कैमरे के सामने मुस्कुराएंगे जरूर, लेकिन मंच के नीचे एक-दूसरे का पैर खींचने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे।
4,000 पुलिसवाले और 200 कैमरे: आखिर गिनती कौन करेगा?
प्रशासन की मुस्तैदी भी माशाल्लाह है! चार हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और 200 तीसरी आँखें (सीसीटीवी कैमरे) आसमान से टिकटकी लगाए बैठी हैं। अब सवाल यह उठता है कि आखिर इतने कैमरों और जवानों की जरूरत क्यों पड़ी? क्या सरकार को डर है कि जनता का सैलाब नेताओं को ही न बहा ले जाए? या फिर ये कैमरे इसलिए लगाए गए हैं ताकि रैली के बाद जब आयोजक ’10 लाख’ की भीड़ का दावा करें, तो जूम करके देखा जा सके कि भीड़ में आम जनता कितनी थी और टोपी पहने कार्यकर्ता कितने! वैसे, इतनी पुलिस देखकर तो यही लगता है कि सुरक्षाकर्मियों की तादाद रैली के श्रोताओं का आंकड़ा बढ़ाने के काम ही आएगी।
दिल्लीवालों के लिए ‘जाम-ए-शहादत’
इस पूरे लोकतान्त्रिक तमाशे में अगर किसी की सचमुच बलि चढ़ने वाली है, तो वो है दिल्ली की बदनसीब जनता। दफ्तर जाने वाले आम लोग सड़कों पर गाड़ियों में बैठे-बैठे इस ‘क्रांति’ का सीधा प्रसारण भुगतेंगे। ‘काक-वाणी’ की सीधी सलाह है: अगर आप नेताओं के ‘देश बचाओ’ भाषणों के बीच खुद को सड़क पर फंसने से बचाना चाहते हैं, तो आज अपने-अपने घरों में दुबक कर रहें। लोकतंत्र का यह उत्सव आपके पेट्रोल और दिमाग, दोनों का तेल निकालने के लिए पूरी तरह तैयार है!
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