व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के चांसलर और स्वयंभू ज्ञानियों ने देश हित में एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब फर्जी खबरों को रोकने के लिए विश्वविद्यालय ने अपना खुद का ‘अल्ट्रा प्रो मैक्स फैक्ट चेक’ विभाग खोल लिया है। इस नए विभाग का दावा है कि अब किसी तीसरे फैक्ट चेकर की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उनके पास सत्यता जांचने के ऐसे अनूठे पैमाने हैं जिन्हें देखकर ऑक्सफोर्ड वाले भी अपना सर पीट लें।
व्हाट्सएप फैक्ट चेक के नए और क्रांतिकारी नियम
इस नए फैक्ट-चेक मॉडल के अनुसार, किसी भी मैसेज की सत्यता जांचने के लिए तीन मुख्य मानकों को देखा जाएगा:
1. यूनेस्को और नासा की मुहर: अगर किसी मैसेज के अंत में लिखा है कि ‘यूनेस्को ने इसे विश्व का सर्वश्रेष्ठ मैसेज घोषित किया है’ या ‘नासा के वैज्ञानिकों ने सैटेलाइट से इसकी पुष्टि की है’, तो वह खबर अपने आप 200% सच मान ली जाएगी। इस पर सवाल उठाना सीधे-सीधे ज्ञान का अपमान माना जाएगा।
2. लाल बत्ती वाले 10 इमोजी: किसी खबर के आगे अगर कम से कम 10 चेतावनी वाले लाल इमोजी (🚨🚨) लगे हैं, तो फैक्ट चेक विभाग उसे ‘अति-महत्वपूर्ण सत्य’ का दर्जा देगा। जितने ज्यादा इमोजी, खबर में उतना ही ज्यादा वजन!
3. ‘फॉरवर्डेड ऐज़ रीसीव्ड’ का रक्षा कवच: अगर कोई ज्ञानी मैसेज भेजकर नीचे लिख दे—”जैसा मिला वैसा भेज दिया, जांच आप खुद करें”—तो समझ लीजिए कि उस खबर को इतिहास के पन्नों में अमर होने का लाइसेंस मिल चुका है।
दवाइयों से लेकर मंगल ग्रह तक का इलाज
व्हाट्सएप के इस नए फैक्ट चेक ने डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है। हाल ही में इस विभाग ने सिद्ध किया है कि अगर आप रात को खाली पेट इलायची खाकर दो बार ‘ओम’ का जाप करेंगे, तो 5G रेडिएशन आपका बाल भी बांका नहीं कर पाएगा। यही नहीं, चांद पर अगली कॉलोनी बसाने की तारीख भी नासा से पहले फैमिली ग्रुप के ‘शर्मा जी’ ने कन्फर्म कर दी है।
निष्कर्ष: फॉरवर्ड करते रहें, सोचते बिल्कुल न रहें!
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रवक्ता ने कहा, “हमारा उद्देश्य लोगों को सोचने के कष्ट से बचाना है। दिमाग चलाने से मानसिक तनाव बढ़ता है, इसलिए बस मैसेज पढ़ें, थोड़ा घबराएं और तुरंत 11 अन्य ग्रुप्स में फॉरवर्ड कर दें।”
तो दोस्तों, अगली बार जब आपके पास कोई मैसेज आए कि “आज रात 12 बजे आसमान से गुलाबी बारिश होगी”, तो घबराएं नहीं। अपने व्हाट्सएप फैक्ट चेक पर भरोसा रखें और तुरंत छाता लेकर छत पर पहुंच जाएं!