व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के नए सेमेस्टर की शुरुआत हो चुकी है और प्रोफेसर ‘शर्मा जी के फूफा’ ने ग्रुप में ज्ञान की पहली बारिश कर दी है। दावा है कि अगर आप सुबह 4:00 बजे उठकर अपने फोन को हल्दी वाले दूध में डुबोएंगे, तो बैटरी 200% चार्ज हो जाएगी। चौंकिए मत! यह तो उस अगाध ज्ञान का बस एक छोटा सा नमूना है, जो रोज सुबह आपके इनबॉक्स में ‘गुड मॉर्निंग’ के फूलों के साथ टपकता है।
यूनेस्को का पसंदीदा काम: भारत को ट्रॉफी बांटना
हर दूसरे दिन व्हाट्सऐप पर एक खबर वायरल होती है- “बधाई हो! यूनेस्को ने भारत के इस व्यंजन या गाने को दुनिया में सबसे बेहतरीन घोषित किया है।” अब सच्चाई यह है कि यूनेस्को वाले पेरिस में बैठकर शायद यही काम कर रहे हैं कि आज किस भारतीय ग्रुप के दावे पर मोहर लगाएं। बेचारों को खुद नहीं पता होता कि उन्होंने कब ‘समोसे’ को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रीय मिठाई घोषित कर दिया!
नासा का सैटेलाइट और रात की वो जादुई रोशनी
दूसरा सबसे लोकप्रिय दावा है नासा (NASA) का। दीवाली हो, नया साल हो या बिजली का कट जाना, नासा तुरंत अंतरिक्ष से भारत की एक चमकती हुई फोटो खींच लेता है। इस दावे की कड़वी सच्चाई यह है कि नासा के वैज्ञानिकों को जब भी कोई नया शोध करना होता है, वे व्हाट्सऐप ग्रुप का रुख करते हैं। आखिरकार, जिस संस्थान के नाम पर “घर के बाहर नींबू-मिर्च टांगने से 5G रेडिएशन रुकता है” जैसे शोध पत्र चल रहे हों, उसकी विश्वसनीयता पर सवाल कौन उठा सकता है?
फ़ैक्ट-चेक: ‘फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड’ की कड़वी सच्चाई
जब हमने इन दावों का गहन ‘काक-फैक्ट-चेक’ किया, तो पता चला कि इन सभी महा-ज्ञान वाले संदेशों का स्रोत कोई वैज्ञानिक प्रयोगशाला नहीं, बल्कि “ज्ञानचंद एंड संस” नाम की एक काल्पनिक खोपड़ी है। वायरल दावों की कड़वी सच्चाई बस इतनी सी है कि ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाने से पहले कोई भी अपनी बुद्धि का इस्तेमाल नहीं करता। अगर ‘फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड’ लिखने से फर्जी बातें सच हो जातीं, तो आज हर घर में एक नोबेल पुरस्कार विजेता सो रहा होता।
इसलिए अगली बार जब आपको व्हाट्सऐप पर मिले कि “यह संदेश 11 लोगों को भेजें, शाम तक लॉटरी लगेगी”, तो समझ जाइए कि लॉटरी सिर्फ उस टेलीकॉम कंपनी की लग रही है जिसका डेटा आप इस कचरे को फैलाने में फूंक रहे हैं। सावधान रहें, सतर्क रहें और व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी के इस ‘मुफ्त ज्ञान’ से अपनी बची-कुची बुद्धि को बचाएं!