यदि आपने आज सुबह उठकर किसी को ‘फॉरवर्डेड एज रिसीव्ड’ वाला ज्ञान भरा मैसेज नहीं भेजा है, तो यकीन मानिए, आप समाज में बहुत पीछे छूट रहे हैं। हमारे देश में ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड से भी बड़ी एक महान संस्था चल रही है, जिसका नाम है—व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी। यहाँ एडमिशन मुफ़्त है, लॉजिक पूरी तरह से प्रतिबंधित है और हर यूजर बिना किसी परीक्षा के सीधे ‘डिपार्टमेन्ट हेड’ की डिग्री लेकर घूमता है।
नासा और यूनेस्को का इकलौता काम
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं की मानें तो दुनिया की दो सबसे बड़ी संस्थाएं, यूनेस्को (UNESCO) और नासा (NASA), केवल हमारे देश के मैसेज प्रमाणित करने के लिए ही बनी हैं। हर दूसरे महीने यूनेस्को भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित कर देता है। वहीं, नासा वाले सूरज की आवाज रिकॉर्ड करके व्हाट्सएप पर भेजते हैं कि उसमें से ‘ओम’ की ध्वनि आ रही है। फैक्ट चेक की कड़वी सच्चाई यह है कि यूनेस्को ने ऐसा कोई सर्टिफिकेट कभी जारी ही नहीं किया और नासा वाले आज भी अंतरिक्ष की असली आवाजें ढूंढ रहे हैं। लेकिन हमारे व्हाट्सएप्पी प्रोफेसरों को सच से क्या लेना-देना?
नींबू और चुटकी भर हल्दी से हर बीमारी का अंत
एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई करने वाले छात्र बेचारों की तरह रो रहे हैं, क्योंकि व्हाट्सएप के वैज्ञानिकों ने कैंसर से लेकर अमरता तक का इलाज ढूंढ निकाला है। एक वायरल मैसेज दावा करता है—”सुबह उठकर गरम पानी में दो बूंद नींबू और हल्दी डालें, कैंसर की कोशिकाएं खुदकुशी कर लेंगी!” सच्चाई यह है कि नींबू से सिर्फ शिकंजी बनती है, किसी बीमारी का पक्का इलाज नहीं होता। इस चक्कर में कई लोग अपनी असली दवाइयां छोड़कर नींबू-मिर्च टांगने में व्यस्त हो चुके हैं।
‘फॉरवर्ड’ बटन दबाने से पहले थोड़ा रुकिए
2000 रुपये के नोट में ‘जीपीएस चिप’ लगाने से लेकर, मैसेज न भेजने पर रात में भूत आने की धमकी तक—इस यूनिवर्सिटी के पास हर बकवास का अटूट खजाना है। काक-वाणी का सीधा सा फैक्ट चेक यही है कि जो ज्ञान आपको बिना मांगे, बिना किसी रिसर्च और बिना सबूत के मुफ़्त में मिल रहा है, वह ज्ञान नहीं बल्कि ‘डिजिटल कचरा’ है। अगली बार जब कोई अलौकिक मैसेज मिले, तो अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें, फॉरवर्ड की जगह डिलीट बटन दबाएं और इस यूनिवर्सिटी से बिना फीस दिए तुरंत ड्रॉपआउट कर लें।