यूनेस्को का नया ऐलान: ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ मैसेज ही है ब्रह्मांड का एकमात्र परम सत्य!

हमारे देश में ज्ञान की गंगा अब हिमालय से नहीं, बल्कि वाई-फाई के सिग्नल्स और सस्ते इंटरनेट पैक से बहती है। इस पावन गंगा के भगीरथ हैं हमारे ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के परम पूजनीय ‘फॉलोवर’ और ‘फॉरवरडर’ भाई-बहन। हाल ही में इस महान विश्वविद्यालय के ‘डिपार्टमेंट ऑफ अफवाह विज्ञान’ ने एक क्रांतिकारी खोज की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर फैलने वाले संदेशों की सत्यता जांचने का एक ऐसा स्वदेशी ‘फैक्ट चेक’ फॉर्मूला ढूंढ निकाला है, जिसे देखकर दुनिया भर के खोजी पत्रकार अपनी डिग्रियां गंगा जी में विसर्जित करने की सोच रहे हैं।

कसौटी नंबर 1: ‘यूनेस्को’ और ‘नासा’ का अदृश्य ठप्पा

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, किसी भी खबर के सच होने के लिए किसी सरकारी दस्तावेज या लैब टेस्ट की जरूरत नहीं है। अगर किसी मैसेज के अंत में लिखा है कि “यूनेस्को ने इसे विश्व का सर्वश्रेष्ठ घोषित किया है”, तो समझ लीजिए कि वह साक्षात ब्रह्म वाक्य है। फिर चाहे मैसेज में यह दावा क्यों न हो कि चाय में हल्दी मिलाकर पीने से इंसान उड़ने लगता है, या नासा के वैज्ञानिकों ने सूरज से निकलने वाली आवाज में ‘ओम’ का जाप रिकॉर्ड किया है। नासा और यूनेस्को जैसी संस्थाओं का अब एकमात्र काम भारतीय व्हाट्सएप ग्रुप्स के संदेशों को सत्यापित करना ही रह गया है।

कसौटी नंबर 2: ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ का परम प्रमाण

व्हाट्सएप ने सच और झूठ का फैसला करने के लिए एक अद्भुत फीचर दिया है— ‘Forwarded many times’ का लेबल। हमारे मोहल्ले के ताऊजी का मानना है कि जो संदेश इतनी बार घूम चुका है, वह भला झूठ कैसे हो सकता है? “क्या दुनिया के करोड़ों लोग मूर्ख हैं जो इसे शेयर कर रहे हैं?”— इस अकाट्य तर्क के आगे न्यूटन और आइंस्टीन के सारे सिद्धांत धराशायी हो जाते हैं। अगर किसी संदेश में लिखा है कि ‘इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक लॉटरी लगेगी’, तो इसे न भेजना सीधे-सीधे अपने भाग्य को लात मारने जैसा है।

कसौटी नंबर 3: फैक्ट-चेकर्स तो देशद्रोही हैं!

अगर कोई सिरफिरा फैक्ट-चेकर सबूतों और विज्ञान के साथ यह साबित करने की कोशिश करे कि 2000 रुपये के नोट में कोई नैनो-जीपीएस चिप नहीं थी, तो यूनिवर्सिटी के छात्र तुरंत अपना अचूक हथियार निकालते हैं। वे उस फैक्ट-चेकर को ‘विदेशी ताकतों का एजेंट’ घोषित कर देते हैं। उनके लिए असली फैक्ट चेक वही है जो उनके मन को भाए, उनके पूर्वाग्रहों को सहलाए और जिसे पढ़कर उन्हें गर्व की अनुभूति हो।

तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आपके फोन पर कोई चमत्कारिक मैसेज आए, तो अपने मस्तिष्क रूपी अंग को कष्ट देने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बस आंखें बंद कीजिए, ‘सेंड टू ऑल’ दबाइए और ज्ञान की इस अविरल धारा में डुबकी लगाइए। आखिरकार, ज्ञान बांटने से ही तो बढ़ता है, भले ही वह पूरी तरह काल्पनिक ही क्यों न हो!

कागा जी