यूनेस्को घोषित सर्वश्रेष्ठ ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के अद्भुत ज्ञान की पोल-खोल!

भारत में उच्च शिक्षा के कई प्रतिष्ठित संस्थान हैं, जैसे आईआईटी और आईआईएम। लेकिन इन सबसे ऊपर एक ऐसा स्वयंभू विश्वविद्यालय है, जिसकी कोई फिजिकल शाखा नहीं है, फिर भी इसके प्रोफेसर और छात्र हर घर में मौजूद हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं परम पूजनीय ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की। यहाँ प्रवेश के लिए किसी प्रवेश परीक्षा की आवश्यकता नहीं है, बस आपके पास एक सस्ता स्मार्टफोन और ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाने वाली उतावली उंगली होनी चाहिए। यहाँ का ज्ञान मुफ़्त है, और मूर्खता असीमित।

यूनेस्को और नासा के ‘सच्चे’ सलाहकार

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के महाज्ञानी शोधकर्ताओं का दावा है कि नासा (NASA) हर दिवाली पर भारत की जगमगाती तस्वीरें खींचकर हैरान रहता है। इतना ही नहीं, संयुक्त राष्ट्र संघ (UNESCO) ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित किया है—यह खबर पिछले दस सालों से हर 15 अगस्त और 26 जनवरी को बिना नागा आपके इनबॉक्स में तैरती है। अगर यूनेस्को के पास सचमुच इतना खाली समय होता, तो वह अब तक अपनी संस्था बंद करके एडमिन पैनल में शामिल हो चुका होता।

नोट में जीपीएस चिप और नींबू से कैंसर का इलाज

इस विश्वविद्यालय के ‘साइंटिस्ट’ ऐसी-ऐसी खोजें करते हैं कि असली वैज्ञानिक अपनी डिग्रियां गंगा में बहाने को मजबूर हो जाएं। याद कीजिए वह दौर जब 2000 रुपये के गुलाबी नोट में ‘नैनो जीपीएस चिप’ होने का दावा किया गया था, जो जमीन के 120 फीट नीचे से भी सीधे सैटेलाइट को सिग्नल भेज सकती थी। आज वह नोट खुद इतिहास की गहराइयों में दफन हो गया, लेकिन हमारे व्हाट्सएप वैज्ञानिकों का आत्मविश्वास आज भी सातवें आसमान पर है। यहाँ कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज सुबह खाली पेट गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से हो जाता है, और अंतरिक्ष से ‘ॐ’ की आवाज आने का दावा तो रोज का है।

ज्ञान बांटने से पहले ‘फैक्ट-चेक’ की कड़वी दवा

इस चमत्कारी विश्वविद्यालय का एकमात्र मूलमंत्र है—”बिना सोचे-समझे आगे भेजें” (Forwarded as received)। यहाँ सच और झूठ की सीमाएं इस तरह मिटा दी गई हैं कि लोग इतिहास को अपनी मर्जी से फिर से लिख रहे हैं। ‘काक-वाणी’ आपसे सविनय निवेदन करती है कि इस ‘फ्री वाई-फाई वाले दिव्य ज्ञान’ के झांसे में न आएं। जब भी कोई संदेश ‘इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक खुशखबरी मिलेगी’ के साथ आए, तो अपनी उंगली को थोड़ा आराम दें और गूगल बाबा से सच जान लें। कहीं ऐसा न हो कि आपके फैलाए ज्ञान को देखकर नासा वाले सचमुच अपना सिर पकड़ लें!

कागा जी