बीबीसी (BBC) आजकल गहरी चिंता में है। चिंता इस बात की है कि भारत के ‘सबसे शक्तिशाली’ राजनीतिक घराने की ‘राजमाता’ यानी सोनिया गांधी जी अपनी किताब में क्या लिखने वाली हैं। ‘काक-वाणी’ के दफ्तर में जब यह खबर उड़ी, तो हमारे कौवे भी डालियों पर पेट पकड़कर हंसने लगे। आखिर इस किताब में ऐसा क्या नया होगा, जो देश की जनता पहले से नहीं जानती?
त्याग की महागाथा या ‘रिमोट कंट्रोल’ का सीक्रेट मैनुअल?
किताब का सबसे रोमांचक अध्याय निश्चित रूप से ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर होगा। साल 2004 का वह ऐतिहासिक पल, जब सोनिया जी ने प्रधानमंत्री की कुर्सी को ‘त्याग’ दिया था। दुनिया इसे ‘महान बलिदान’ कहती है, लेकिन काक-वाणी इसे ‘रिमोट कंट्रोल टेक्नोलॉजी’ का सबसे सफल और पहला ऐतिहासिक परीक्षण मानती है। किताब में शायद इस बात का गाइड-मैप हो कि बिना किसी जवाबदेही के ‘सुपर-पीएम’ कैसे बना जाता है। डॉक्टर मनमोहन सिंह जी की फाइलें 10 जनपथ से होकर कैसे गुजरती थीं और कैसे ‘मौन’ रहने की कला में पीएचडी की जाती है, इस पर एक शानदार ट्यूटोरियल होना ही चाहिए।
राहुल बाबा को ‘लॉन्च’ करने के 101 नुस्खे
देश की जनता यह जानने के लिए भी बेताब है कि राहुल गांधी को हर दो साल में ‘री-लॉन्च’ करने की प्रेरणा सोनिया जी को कहाँ से मिलती है। क्या किताब में इस बात का फॉर्मूला होगा कि कैसे एक अर्ध-शताब्दी पार कर चुके ‘युवा नेता’ को बार-बार राजनीति का फ्रेशर बनाकर पेश किया जाए? इसमें ‘आलू से सोना’ बनाने की वैचारिक मशीनरी का भी कोई गुप्त अध्याय हो, तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए। वैसे, राजनीतिक लॉन्चिंग के मामले में इसरो (ISRO) को भी कांग्रेस से ट्यूशन लेना चाहिए।
दामाद जी का ‘जमीन’ से जुड़ाव
क्या इस संस्मरण में प्रिय दामाद रॉबर्ट वाड्रा की अद्भुत व्यापारिक प्रतिभा पर भी रोशनी डाली जाएगी? कैसे एक आम इंसान बिना किसी जादू के, सिर्फ ‘हवा के झोंके’ से जमीनों का बेताज बादशाह बन जाता है, यह देश के हर बेरोजगार युवा के लिए स्टार्ट-अप गाइड का काम कर सकता है। बीबीसी भले ही इसे ‘पावरफुल डायनेस्टी’ की कहानी कहे, लेकिन भारत के लोग इसे ‘मजबूर लोकतंत्र’ और ‘मजबूत परिवार’ की दास्तान के रूप में ही पढ़ेंगे। खैर, किताब जब आएगी तब आएगी, तब तक कांग्रेस कार्यकर्ता इसे ‘पवित्र ग्रंथ’ मानकर आरती उतारने की रिहर्सल कर सकते हैं। कांव-कांव!
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