राहुल गांधी की ‘थाना-यात्रा’ और भाजपा का ‘अराजकता’ विलाप

देश के राजनीतिक रंगमंच पर एक नया और बेहद संवेदनशील अध्याय जुड़ गया है। अब तक हमने ‘भारत जोड़ो यात्रा’ देखी थी, लेकिन अब देश ‘थाना जोड़ो यात्रा’ का गवाह बन रहा है। जैसे ही राहुल गांधी महोदय अपने लाव-लश्कर के साथ एक अदद थाने में धरने पर बैठे, सत्तापक्ष के खेमे में मानो भूचाल आ गया। थाने की उस ठंडी फर्श पर बैठकर जब राहुल जी ने न्याय की गुहार लगाई, तो दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में ऐसी गर्मी बढ़ी कि तुरंत प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलानी पड़ गई। भाजपा ने इसे ‘अराजकता की राजनीति’ घोषित कर दिया। सच ही तो है, थाने में अपराधियों और पुलिसवालों के अलावा किसी राजनेता का जाना भला हमारी पावन लोकतांत्रिक परंपराओं को कैसे गंवारा हो सकता है?

थाना ही तो है नया लोकतंत्र का मंदिर!

काक-वाणी के चश्मे से देखें तो भाजपा की चिंता बिल्कुल जायज है। जब भाजपा विपक्ष में हुआ करती थी, तब थाने का घेराव ‘जनता की आवाज’ और ‘पवित्र सत्याग्रह’ कहलाता था। लेकिन सत्ता के सिंहासन पर बैठते ही राजनीतिक शब्दकोश पूरी तरह बदल जाता है। अब अगर विपक्ष के नेता थानों में जाकर बैठ जाएंगे, तो हमारे सीधे-साधे पुलिस अधिकारी चाय-समोसे का इंतजाम करेंगे या वीआईपी सुरक्षा संभालेंगे? भाजपा का मानना है कि धरना देने और कानून को हाथ में लेने का एकाधिकार सिर्फ उनके इतिहास तक सीमित होना चाहिए, विपक्ष द्वारा ऐसा करना सीधे देश को गृहयुद्ध की ओर धकेलना है। आखिर लोकतंत्र की यही तो खूबसूरती है—’हम करें तो मर्यादा पुरुषोत्तम, तुम करो तो अराजक तत्व!’

‘मोहब्बत की दुकान’ अब थाने के अंदर!

राहुल गांधी भी कमाल करते हैं। ‘मोहब्बत की दुकान’ खोलने के लिए उन्हें पूरे देश में कोई और जगह नहीं मिली, तो वे सीधे पुलिस थाने ही पहुंच गए। शायद वे देखना चाहते थे कि वहां कानून का डंडा कितनी ‘मोहब्बत’ से चलता है। उधर भाजपा के प्रवक्ताओं को रात को नींद नहीं आ रही है। उन्हें डर है कि कहीं राहुल गांधी की यह ‘अराजकता’ इतनी न बढ़ जाए कि पुलिसवाले भी विपक्ष की ‘मोहब्बत’ के जाल में फंसकर असली काम करना ही भूल जाएं।

खैर, इस पूरी नूराकुश्ती में जनता को मुफ्त का मनोरंजन मिल रहा है। एक तरफ ‘अराजकता’ का शोर है, तो दूसरी तरफ ‘लोकतंत्र बचाने’ का राग। काक-वाणी तो यही कहेगी कि जब तक हमारे माननीय नेता थानों में बैठकर धरना-प्रदर्शन का खेल खेलते रहेंगे, तब तक देश की जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सकती है। आखिरकार, नेता जी जब तक थाने के अंदर धरने पर व्यस्त रहेंगे, तब तक बाहर की दुनिया में शांति बनी रहेगी!


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कागा जी