विक्की कौशल के पापा शाम कौशल का बड़ा खुलासा: ‘हवा में उड़ने वाले स्टंट्स नहीं, कहानी वाला एक्शन है असली बॉस!’

बॉलीवुड में जब भी खतरनाक स्टंट्स और रोंगटे खड़े कर देने वाले एक्शन दृश्यों की बात होती है, तो एक नाम सबसे पहले जहन में आता है – शाम कौशल। जी हां, उरी फेम विक्की कौशल के पिता और हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्शन डायरेक्टर शाम कौशल ने हाल ही में बॉलीवुड में एक्शन के बदलते स्वरूप पर खुलकर बात की है। उन्होंने साफ किया है कि उनका असली लक्ष्य फिल्मों में ऐसा एक्शन डालना है जो सीधे तौर पर फिल्म की स्क्रिप्ट और कहानी को मजबूत करे, न कि सिर्फ पर्दे पर बेवजह की तबाही मचाए।

कहानी ही है असली हीरो: शाम कौशल का मंत्र

काक-वाणी के खास पाठकों के लिए यह जानना बेहद दिलचस्प होगा कि शाम कौशल का एक्शन को लेकर एक बिल्कुल अलग और अनोखा नजरिया है। उन्होंने अपने हालिया इंटरव्यू में कहा, “मेरा मकसद सिर्फ ऐसा एक्शन डिलीवर करना है जो कहानी की सेवा करे।” उनका मानना है कि अगर एक्शन सीन दर्शकों को फिल्म की मूल कहानी से भटका दे, तो वह एक्शन पूरी तरह से बेकार है।

आजकल की फिल्मों में जहां बेवजह की मारधाड़, गाड़ियां उड़ाना और भारी-भरकम वीएफएक्स (VFX) का ओवरडोज देखने को मिलता है, वहीं शाम कौशल का यह बयान बॉलीवुड के नए निर्देशकों के लिए एक बड़ा सबक है। उनके अनुसार, जब तक दर्शक पर्दे पर दिख रहे किरदार के दर्द, गुस्से और उसकी परिस्थितियों से नहीं जुड़ेंगे, तब तक कोई भी एक्शन सीक्वेंस उन्हें रोमांचित नहीं कर सकता। एक्शन में भावनाएं होना सबसे जरूरी है।

विक्की कौशल के पापा का बॉलीवुड एक्शन को नया रूप

शाम कौशल ने पिछले कई दशकों से इंडस्ट्री को अपनी बेहतरीन सेवाएं दी हैं। ‘दंगल’, ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’, ‘बजरंगी भाईजान’ और ‘पद्मावत’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों में उनके द्वारा डिजाइन किए गए एक्शन सीन्स आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में बसे हैं। उन्होंने हमेशा यह साबित किया है कि बिना किसी फालतू ड्रामे के भी एक्शन को बेहद रियलिस्टिक, जमीनी और प्रभावशाली बनाया जा सकता है।

विक्की कौशल और सनी कौशल जैसे टैलेंटेड बेटों के पिता शाम कौशल ने अपने बच्चों को भी काम के प्रति यही सादगी और संजीदगी सिखाई है। शाम कौशल का यह नजरिया निश्चित रूप से बॉलीवुड की आने वाली फिल्मों में एक्शन की परिभाषा को पूरी तरह से बदलने का दम रखता है।

तो दोस्तों, क्या आप भी शाम कौशल की इस बात से सहमत हैं कि फिल्मों में एक्शन सिर्फ कहानी को आगे बढ़ाने का जरिया होना चाहिए, न कि केवल तालियां बटोरने का हथकंडा? अपनी राय जरूर साझा करें और बॉलीवुड की ऐसी ही धमाकेदार खबरों के लिए पढ़ते रहिए काक-वाणी!


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कागा जी