नमस्कार पाठकों! स्वागत है ‘काक-वाणी’ की विशेष शाखा ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’ में। हाल ही में हमारे गुप्तचरों (यानी आपके और हमारे परिवार के पूजनीय ताऊजी-चाचाजी) से पता चला है कि सोशल मीडिया पर अफवाहों की बाढ़ को रोकने के लिए एक बेहद क्रांतिकारी ‘फैक्ट-चेक’ सिस्टम शुरू किया गया है। अब तक आप केवल बिना सिर-पैर की झूठी खबरों से परेशान थे, लेकिन अब आपको उन अफवाहों का ऐसा ‘सच्चा’ विश्लेषण मिलेगा कि खुद विज्ञान भी कोमा में चला जाएगा।
यूनेस्को और नासा का नया ज्वाइंट वेंचर
इस नए स्वघोषित फैक्ट-चेक विभाग के तहत सबसे पहला और बड़ा खुलासा यह हुआ है कि यूनेस्को (UNESCO) ने भारत के राष्ट्रगान को फिर से ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित करने से मना कर दिया है, क्योंकि इस बार उन्होंने इसे सीधे ‘ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ संगीत’ घोषित कर दिया है! इसके साथ ही, नासा (NASA) के वैज्ञानिकों ने भी उपग्रह से ली गई तस्वीरों के जरिए पुष्टि की है कि भारत में जब भी कोई गृहणी सुबह झाड़ू लगाती है, तो अंतरिक्ष से नकारात्मक ऊर्जा का विनाश होते हुए साफ देखा जा सकता है। हमारे फैक्ट-चेकर ताऊजी ने इस खबर को ‘Forwarded as received’ की डिजिटल मोहर लगाकर शत-प्रतिशत प्रमाणित घोषित कर दिया है।
वैज्ञानिकों के बाल उड़े, पर सच सामने आया!
अगला बड़ा फैक्ट-चेक स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा है। वॉट्सऐप के शीर्ष कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन (जो असल में दिन में परचून की दुकान चलाते हैं और रात में ज्ञान बांटते हैं) ने यह साबित कर दिया है कि अगर आप सुबह उठकर बिना कुल्ला किए आधा लीटर तांबे के बर्तन का पानी पीते हैं, तो आपके शरीर के सारे टॉक्सिन तो बाहर निकलेंगे ही, साथ ही आपके पुराने बैंक लोन भी अपने आप माफ हो जाएंगे। इस क्रांतिकारी फैक्ट-चेक को चुनौती देने वाले किसी भी तर्कशास्त्री को तुरंत ग्रुप से ‘रिमूव’ करने का कड़ा दंड निर्धारित किया गया है, क्योंकि सच हमेशा कड़वा होता है और ग्रुप एडमिन की सत्ता सर्वोपरि है।
फैक्ट-चेक का स्वर्ण नियम: ‘लिखा है तो सच ही होगा’
इस डिजिटल यूनिवर्सिटी के कुलसचिव यानी ‘ग्रुप एडमिन’ का कहना है कि हमारा फैक्ट-चेक नियम बहुत सरल है। यदि किसी संदेश के अंत में ‘कृपया इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि लोगों का भला हो’ या ‘इसे अनदेखा करने पर भारी नुकसान हो सकता है’ लिखा है, तो वह संदेश अकाट्य सत्य है। उसे किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। अंततः, काक-वाणी आपसे यही अपील करती है कि अपने विवेक और बुद्धि को थोड़ी देर विश्राम दें, अपने अंगूठे को कष्ट दें और इस परम ज्ञान को तुरंत १० और ग्रुप्स में फॉरवर्ड करें। आखिर अफवाहों का पेट भी तो हम इंसानों के भरोसे ही पलता है!