व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया फैक्ट-चेक विभाग: अब हर झूठ को मिलेगा ‘सच्चाई का सर्टिफिकेट’

प्रिय पाठकों, देश-विदेश के वैज्ञानिकों और हमारे मोहल्ले के शर्मा जी के अथक प्रयासों के बाद, आखिरकार ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ ने अपना आधिकारिक ‘फैक्ट-चेक’ विभाग खोल लिया है। अब तक आप लोग पीआईबी और अन्य संस्कारी संस्थानों के फैक्ट-चेक से परेशान थे, जो आपके पसंदीदा और सतरंगे फॉरवर्ड्स को ‘फर्जी’ बताकर आपके सुबह-सुबह के उत्साह पर पानी फेर देते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस नए विभाग का एकमात्र उद्देश्य है—आपकी हर अंधश्रद्धा और अफवाह को वैज्ञानिक प्रमाण देना।

हमारा नियम: ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ ही परम सत्य है

इस नए फैक्ट-चेक विभाग के नियम बेहद सरल और वैज्ञानिक हैं। पहला नियम यह है कि यदि कोई मैसेज ‘Forwarded many times’ के टैग के साथ आता है, तो उसकी सत्यता पर सवाल उठाना सीधे-सीधे ज्ञान का अपमान माना जाएगा। हमारे मुख्य फैक्ट-चेकर ‘ज्ञानचंद जी’ का कहना है, “अगर कोई बात दस लाख लोग शेयर कर रहे हैं, तो वह झूठ कैसे हो सकती है? लाखों अंगूठे कभी गलत नहीं हो सकते!”

सफलतापूर्वक वेरिफाई किए गए कुछ मुख्य ‘तथ्य’

हमारे विभाग ने हाल ही में अपनी अत्याधुनिक तकनीक (यानी बिना सोचे-समझे विश्वास करने की क्षमता) का उपयोग करके कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण दावों को ‘शत-प्रतिशत सत्य’ प्रमाणित किया है:

१. यूनेस्को का सर्वश्रेष्ठ पुरस्कार: यूनेस्को ने केवल भारत के राष्ट्रगान को ही नहीं, बल्कि सुबह-सुबह भेजे जाने वाले ‘ओस की बूंदों वाले गुलाब’ के गुड मॉर्निंग मैसेज को भी दुनिया का सर्वश्रेष्ठ संदेश घोषित किया है।

२. जीपीएस चिप वाला नोट: बंद हो चुके २००० के नोट में सचमुच एक ऐसा नैनो-जीपीएस चिप था, जो सीधे एलियंस से संपर्क साधता था। नोट बंद होने के बाद से ही परग्रहियों ने पृथ्वी पर आना बंद कर दिया है।

३. नासा की पुष्टि: दिवाली की रात भारत के घरों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा के कारण अंतरिक्ष में ब्लैक होल का आकार छोटा हो गया था, नासा के वैज्ञानिकों ने खुद ताली बजाकर इसकी पुष्टि की है।

सच्चाई से हमारा कोई लेना-देना नहीं

इस फैक्ट-चेक विभाग की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां तथ्यों की जांच के लिए किसी तर्क, लॉजिक या सबूत की आवश्यकता नहीं होती। अगर आपके फूफा जी ने यह मैसेज पूरे पारिवारिक ग्रुप में भेजा है, तो वह अपने आप में एक अकाट्य प्रमाण है। तो देर किस बात की? आज ही से इस नए फैक्ट-चेक पर भरोसा करें और बिना सोचे-समझे उंगलियां चलाते रहें। याद रखिए, सोचना-समझना दिमाग का काम है, और व्हाट्सएप चलाने के लिए दिमाग की नहीं, सिर्फ अंगूठे की जरूरत होती है!

कागा जी