व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया ‘परम सत्य’ यंत्र: अब झूठ भी लगेगा एकदम असली!

नमस्कार, ‘काक-वाणी’ के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ विभाग में आपका स्वागत है। हमारे खुफिया सूत्रों (पड़ोस वाले शर्मा जी के फॉरवर्डेड मैसेज) से पता चला है कि इंटरनेट पर फैले ‘अंधविश्वास और अफवाहों’ से तंग आकर व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर्स ने एक नया और क्रांतिकारी ‘फैक्ट-चेक’ सिस्टम लॉन्च किया है। इस सिस्टम का नाम है – ‘सत्यमेव जयते प्रो मैक्स’!

क्या है यह नया ‘फैक्ट-चेक’ और यह कैसे काम करता है?

आमतौर पर फैक्ट-चेक करने वाली संस्थाएं सबूत ढूंढती हैं, वैज्ञानिक तर्क देती हैं और सच सामने लाती हैं। लेकिन हमारी प्यारी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का मानना है कि ‘सच्चाई बहुत उबाऊ होती है’। इसलिए, नए नियमों के अनुसार, अब किसी भी मैसेज को सच साबित करने के लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं है। बस उस मैसेज के अंत में तीन जादुई शब्द लिखे होने चाहिए – “नासा ने पुष्टि की है”, “यूनेस्को ने सर्वश्रेष्ठ घोषित किया है” या फिर “इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक खुशखबरी मिलेगी।”

अगर आपके पास कोई ऐसा मैसेज आता है जिसमें दावा किया गया है कि ‘नींबू पानी पीने से कोरोना तो क्या, ब्लैक होल भी ठीक हो सकता है’, तो नया फैक्ट-चेक एल्गोरिदम इसे तुरंत 100% प्रामाणिक मान लेगा। आखिरकार, ग्रुप के एडमिन और घर के बड़े-बुजुर्गों द्वारा भेजा गया संदेश गलत कैसे हो सकता है? उनकी भावनाओं को आहत करना सबसे बड़ा वैज्ञानिक अपराध घोषित कर दिया गया है।

नए फैक्ट-चेकर के अनोखे मापदंड

इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम ने सत्यता जांचने के कुछ कड़े और बेहद ‘वैज्ञानिक’ पैमाने तय किए हैं:

1. फोंट का आकार और इमोजी की संख्या: अगर मैसेज में कम से कम दस तिरंगे, पांच हाथ जोड़ने वाले इमोजी और लाल रंग के खतरे वाले निशान नहीं हैं, तो उस खबर को संदिग्ध माना जाएगा।

2. महान हस्तियों की जबरन गवाही: मैसेज में अल्बर्ट आइंस्टीन, एपीजे अब्दुल कलाम या चाणक्य का नाम जबरन घुसाया होना चाहिए, भले ही उन्होंने वह बात जीवन में कभी न कही हो। जैसे- “चाणक्य ने कहा था कि जो सुबह उठकर व्हाट्सएप स्टेटस नहीं लगाता, उसका पतन निश्चित है।”

सच्चाई का अंतिम संस्कार और फॉरवर्ड का त्योहार

इस नए फैक्ट-चेक के आने के बाद, समाज में एक गजब की बौद्धिक शांति फैल गई है। अब किसी को गूगल करने की जहमत नहीं उठानी पड़ती। अगर शर्मा जी ने भेजा है, तो वो परम सत्य ही होगा।

काक-वाणी आपसे सविनय अपील करती है कि अपने तर्क और बुद्धि का चश्मा उतारिए, व्हाट्सएप की असीम ज्ञान-गंगा में डुबकी लगाइए और बिना सोचे-समझे ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाते रहिए। क्योंकि याद रखिए, अफवाह फैलाना एक सामाजिक जिम्मेदारी है, और हम सब इस जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे हैं!

कागा जी