व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ‘परम ज्ञानी’ और नासा द्वारा प्रमाणित नीम का पत्ता

भारत में वैसे तो आईआईटी और आईआईएम जैसे कई बड़े संस्थान हैं, लेकिन ज्ञान का जो असली और असीमित भंडार हमारे ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के पास है, उसकी तुलना दुनिया का कोई भी विश्वविद्यालय नहीं कर सकता। इस यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ प्रवेश के लिए किसी परीक्षा की ज़रूरत नहीं होती, बस एक स्मार्टफोन और एक चालू इंटरनेट कनेक्शन काफी है। यहाँ का हर छात्र सीधे ‘प्रोफेसर’ की डिग्री लेकर ही ग्रुप में एंट्री करता है।

नासा और यूनेस्को का वो ‘गोपनीय’ गठबंधन

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के अनुसार, दुनिया की हर बड़ी खोज का सीधा संबंध नासा (NASA) और यूनेस्को (UNESCO) से होता है। अगर हमारे राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित करना हो, तो यूनेस्को बिना किसी देरी के व्हाट्सएप चैट पर अपनी मुहर लगा देता है। वहीं, दीवाली की रात अंतरिक्ष से भारत कैसा जगमगाता हुआ दिखता है, इसकी तस्वीरें नासा के वैज्ञानिक सिर्फ इसी यूनिवर्सिटी के इनबॉक्स में सीधे सैटेलाइट से भेजते हैं। सच्चाई यह है कि नासा के वैज्ञानिकों को खुद नहीं पता होता कि वे भारत के नीम के पत्तों से कोरोना और कैंसर का इलाज खोज चुके हैं, जिसका दावा आपके फूफाजी रोज सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ इमेज के साथ भेजते हैं।

ग्यारह लोगों को भेजें और करोड़पति बनें

इस विश्वविद्यालय का सबसे लोकप्रिय रिसर्च पेपर है – ‘फॉरवर्ड थेरेपी’। अगर आप इस चमत्कारी संदेश को ग्यारह लोगों को भेजेंगे, तो शाम तक कोई बड़ी खुशखबरी मिलेगी। और अगर डिलीट कर दिया, तो मोबाइल ब्लास्ट भी हो सकता है! आधुनिक विज्ञान आज तक यह नहीं समझ पाया कि किसी मैसेज को फॉरवर्ड करने से किसी की बंद किस्मत का ताला कैसे खुल सकता है। लेकिन हमारे व्हाट्सएप के ‘परम ज्ञानी’ इस थ्योरी पर अडिग हैं। वह तो भला हो व्हाट्सएप के मालिकों का, जिन्होंने ‘फॉरवर्ड लिमिटेड’ का फीचर लाकर इस ज्ञान की गंगा पर थोड़ा ब्रेक लगाया, वरना अब तक लोग फॉरवर्ड कर-कर के मंगल ग्रह पर भी अपनी जमीन रजिस्ट्री करवा चुके होते।

काक-वाणी की नसीहत: दिमाग फॉरवर्ड नहीं होता

काक-वाणी का सीधा और सच्चा संदेश यही है कि इस डिजिटल यूनिवर्सिटी के मुफ्त ज्ञान से थोड़ा बचकर रहें। जिस भी खबर के अंत में ‘इसे जनहित में ज्यादा से ज्यादा शेयर करें’ लिखा हो, उसे तुरंत शक की निगाह से देखें। अपनी बुद्धि को व्हाट्सएप ग्रुप्स में गिरवी न रखें। अगली बार जब कोई ‘नासा प्रमाणित’ या ‘यूनेस्को घोषित’ मैसेज आए, तो उसे आगे बढ़ाने से पहले एक बार गूगल के सर्च इंजन पर जाकर ‘फैक्ट-चेक’ ज़रूर कर लें। याद रखें, अंधविश्वास और अफवाहें फैलाना ज्ञान नहीं, बल्कि अज्ञानता का सबसे बड़ा फॉरवर्डेड मैसेज है।

कागा जी