व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का दिव्य ज्ञान: जब नासा के वैज्ञानिकों ने भी टेक दिए घुटने

प्रणाम पाठकों! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। हमारे देश में शिक्षा के कई स्तर हैं, लेकिन सबसे ऊंचा और अकाट्य स्तर है—’व्हाट्सएप फॉरवर्ड’। इस विश्वविद्यालय से डिग्री प्राप्त करने के लिए आपको किसी परीक्षा की नहीं, बस एक अंगूठे और ‘फॉरवर्ड’ बटन की आवश्यकता होती है। आज हम ऐसे ही कुछ अद्भुत और वैज्ञानिक दावों की कड़वी (या कहें तो बेहद मीठी और मजेदार) सच्चाई लेकर आए हैं।

यूनेस्को का पसंदीदा काम: भारत को अवॉर्ड बांटना

व्हाट्सएप के ज्ञानियों के अनुसार, यूनेस्को (UNESCO) के पास दुनिया में और कोई काम नहीं बचा है। वे सुबह उठते ही सबसे पहले भारत के राष्ट्रगान को ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित करते हैं। फिर दोपहर की चाय के साथ हमारी सड़कों, नदियों और यहाँ तक कि पड़ोसी शर्मा जी के लड़के को सर्वश्रेष्ठ घोषित कर देते हैं। कड़वा सच यह है कि यूनेस्को के मुख्यालय में ऐसी किसी घोषणा की फाइल ढूंढने पर भी नहीं मिलेगी। बेचारे यूनेस्को वाले खुद हैरान हैं कि उन्होंने इतने अवॉर्ड कब और किसे दे दिए!

₹2000 के नोट में छिपी ‘स्वदेशी नैनो जीपीएस चिप’

याद कीजिए वह सुनहरा दौर जब दावा किया गया था कि हमारे गुलाबी नोट में एक ऐसी चिप है जो पाताल लोक से भी सिग्नल भेज सकती है। अगर आप नोट को तिजोरी में बंद कर दें, तब भी उपग्रह सीधे आपके घर का पता लगा लेगा। इस क्रांतिकारी तकनीक के डर से कई लोगों ने तो नोट को एल्युमिनियम फॉयल में लपेटकर रख दिया था। लेकिन सच यह निकला कि नोट में चिप तो दूर, साधारण सा धागा भी ठीक से नहीं टिक पाया और नोट खुद ही इतिहास के पन्नों में गुम हो गया।

नासा की खोज: अंतरिक्ष में गूंजता ‘ॐ’

जब भी विज्ञान कोई नई खोज करता है, व्हाट्सएप के शोधकर्ता तुरंत दावा कर देते हैं कि यह तो हमारे यहाँ सदियों पहले लिखा जा चुका था। ऐसा ही एक दावा था कि नासा (NASA) ने अंतरिक्ष से आने वाली आवाज को रिकॉर्ड किया, जो हूबहू ‘ॐ’ जैसी सुनाई देती है। जब वैज्ञानिकों ने माथा पीटा, तब पता चला कि वह सूर्य की सामान्य ध्वनि तरंगें थीं, जिन्हें व्हाट्सएप के महान संगीतकारों ने अपनी सुविधा के अनुसार रीमिक्स कर दिया था।

निष्कर्ष: दिमाग का ऐप भी अपडेट करें

प्रिय पाठकों, हमारे स्मार्टफोन में हर ऐप अपडेट होता है, लेकिन हमारे खोपड़ी के अंदर जो ‘दिमाग’ नामक ऐप है, उसे हम अक्सर ‘आउटडेटेड’ ही छोड़ देते हैं। अगली बार जब आपके पास कोई ऐसा संदेश आए जिसके अंत में लिखा हो “इसे कम से कम 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी”, तो कृपया उस पर विराम लगाएं। याद रखिए, कड़वी सच्चाई यही है कि ज्ञान बांटने से बढ़ता है, लेकिन अंधविश्वास बांटने से सिर्फ हंसी का पात्र बनता है।

कागा जी