यदि आपके पास भी सुबह-सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ के गुलाब के फूलों के साथ एक ऐसा संदेश आता है जिसमें लिखा हो कि यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है, तो बधाई हो! आप ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के एक और गौरवशाली छात्र बन चुके हैं। इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बिना किसी परीक्षा, रिसर्च और डिग्री के, हर कोई रातों-रात वैज्ञानिक, इतिहासकार और डॉक्टर बन जाता है।
यूनेस्को का वो ‘रहस्यमयी’ अवॉर्ड जो कभी मिला ही नहीं
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के सबसे लोकप्रिय पाठ्यक्रमों में से एक है – “यूनेस्को द्वारा भारत को सर्वश्रेष्ठ घोषित करवाना”। चाहे वह हमारा राष्ट्रगान हो, हमारे प्रधानमंत्री हों, या हमारी पुरानी करेंसी, यूनेस्को हर हफ्ते भारत को कोई न कोई ‘सर्वश्रेष्ठ’ होने का सर्टिफिकेट बांटता रहता है। जब ‘काक-वाणी’ ने इसकी पड़ताल की, तो पता चला कि बेचारी यूनेस्को संस्था को खुद नहीं पता कि उसने कब और किसे यह अवॉर्ड दे दिया! लेकिन व्हाट्सएप ग्रुप के ‘एडमिन साहब’ को पूरा यकीन है कि यूनेस्को के मुख्यालय में केवल भारतीय संदेशों पर ही मुहर लगाई जाती है।
नासा की सैटेलाइट से खिंची ‘दिवाली वाली’ तस्वीर
हर साल दिवाली के अगले दिन एक रंग-बिरंगी तस्वीर वायरल होती है, जिसे नासा की सैटेलाइट द्वारा ली गई भारत की तस्वीर बताया जाता है। इस तस्वीर में भारत ऐसा जगमगाता है जैसे पूरी दुनिया की बिजली वहीं ट्रांसफर कर दी गई हो। सच तो यह है कि नासा के वैज्ञानिक खुद हैरान हैं कि उनकी सैटेलाइट बिना उनके बताए ऐसी कमाल की फोटोशॉप कलाकारी कैसे कर लेती है। असल में यह एक थ्री-डी ग्राफिक इमेज होती है, जिसे हर साल ‘सच्ची देशभक्ति’ का तड़का लगाकर परोसा जाता है।
नींबू, लौंग और कपूर: हर बीमारी का रामबाण इलाज
दुनियाभर के मेडिकल साइंटिस्ट जहाँ सालों की रिसर्च के बाद किसी बीमारी का इलाज खोज पाते हैं, वहीं व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ‘घरेलू नुस्खा विभाग’ के पास कैंसर से लेकर कोरोना तक का इलाज मात्र एक नींबू, दो लौंग और कपूर की पोटली में बंद है। “सावधान! इस मैसेज को 11 लोगों को भेजें और चमत्कार देखें” – ऐसे दावों को पढ़कर असली डॉक्टरों ने तो अपनी डिग्रियां दीवार से उतारकर अलमारी में बंद करने का मन बना लिया है।
काक-वाणी का कड़वा सच
सच्चाई यह है कि इस मुफ्त की यूनिवर्सिटी का ज्ञान केवल ‘फॉरवर्ड’ की स्पीड पर चलता है, तथ्यों के पेट्रोल पर नहीं। यहाँ झूठ इतनी खूबसूरती से परोसा जाता है कि सच भी शरमा जाए। इसलिए अगली बार जब कोई सनसनीखेज दावा आपके इनबॉक्स में दस्तक दे, तो अंगूठे को ‘फॉरवर्ड’ बटन पर दबाने से पहले अपने दिमाग की घंटी जरूर बजाएं। याद रखिए, हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती, और हर व्हाट्सएप मैसेज सच नहीं होता!