नमस्कार, ‘काक-वाणी’ के प्रिय सुधी पाठकों! आज हम सोशल मीडिया के उस महा-विश्वविद्यालय की चर्चा करेंगे, जिसकी डिग्री के सामने ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड भी पानी भरते हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की, जहां ज्ञान की गंगा सीधे नाली से निकलकर आपके इनबॉक्स तक बहती है। हाल ही में इस यूनिवर्सिटी ने एक नया ‘फैक्ट-चेक’ सिस्टम लॉन्च किया है, जिसके नियम इतने वैज्ञानिक हैं कि अल्बर्ट आइंस्टीन भी अपनी कब्र में बैठकर माथा पीट रहे होंगे।
नया नियम: ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ ही असली प्रमाण है
पुराने जमाने में लोग किसी खबर को सच मानने के लिए अखबार, टीवी या सरकारी आंकड़ों को टटोलते थे। कितने पिछड़े थे वे लोग! व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नए फैक्ट-चेक के अनुसार, यदि किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ लिखा आ जाए, तो उसे सीधे ईश्वरीय सत्य मान लेना चाहिए। नियम सरल है – अगर कोई झूठ दस लाख लोग शेयर कर रहे हैं, तो वह झूठ कैसे हो सकता है? बहुमत की लाठी से सच को भैंस की तरह हांका जा सकता है।
गूगल और नासा की ‘नई’ खोजें
इस नए फैक्ट-चेक के तहत यूनेस्को और नासा रोज नए सर्टिफिकेट बांटते हैं। कभी भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया जाता है, तो कभी दिवाली की रात अंतरिक्ष से भारत की फोटो दिखाकर नासा के वैज्ञानिकों को रोते हुए दिखाया जाता है। अगर गूगल इस जानकारी को गलत बताता है, तो व्हाट्सएप के कुलपति तुरंत नया नियम लागू करते हैं: ‘गूगल को खुद कुछ नहीं पता, वह विदेशी साजिश का हिस्सा है।’ असली फैक्ट तो वो है जो आपके मोहल्ले के फूफाजी ने सुबह 5 बजे ‘गुड मॉर्निंग’ इमेज के साथ भेजा है।
‘फैक्ट-चेकर’ ही सबसे बड़ा देशद्रोही है
अगर कोई सिरफिरा असली फैक्ट-चेक वेबसाइट का लिंक भेजकर यह साबित करने की कोशिश करे कि ‘प्लास्टिक की पत्तागोभी’ या ‘जीपीएस चिप वाला नोट’ महज एक अफवाह है, तो व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का सुरक्षा तंत्र तुरंत सक्रिय हो जाता है। ऐसे फैक्ट-चेकर को तुरंत ‘ग्रुपद्रोही’ घोषित कर दिया जाता है। ग्रुप एडमिन अपनी तानाशाही शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उसे ग्रुप से बाहर का रास्ता दिखा देता है। क्योंकि हमारे यहां सत्य की खोज नहीं, बल्कि मनपसंद झूठ का जश्न मनाया जाता है।
वैज्ञानिक फैक्ट-चेक का अनोखा तरीका
इस विश्वविद्यालय में फैक्ट-चेक की प्रक्रिया बेहद आधुनिक है। यदि आपको किसी खबर पर शक हो, तो उसे जांचने के लिए दिमाग की जरूरत नहीं है। बस नीचे लिखे निर्देश का पालन करें: ‘इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी।’ अगर आपने नहीं भेजा, तो आपको ब्लॉक कर दिया जाएगा। यही इस दुनिया का अंतिम फैक्ट-चेक है।
तो प्रिय पाठकों, दिमाग का इस्तेमाल बंद कीजिए, व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स की शरण में आइए और सोशल मीडिया के इस नए फैक्ट-चेक का आनंद लीजिए। क्योंकि सच तो आखिर वही है, जिसे आप सच मानना चाहते हैं!