व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया ‘परम सत्य’ फैक्ट-चेक: फॉरवर्ड करो और सच बनाओ!

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति और ज्ञान के स्वघोषित देवताओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। अफवाहों के इस पावन महासागर में अब एक नया मील का पत्थर स्थापित हो गया है—’सोशल मीडिया का नया फैक्ट चेक’। अब तक आपको लगता था कि फैक्ट-चेकिंग का काम निष्पक्ष पत्रकार या वैज्ञानिक करते हैं, तो अपनी इस गलतफहमी को तुरंत डिलीट कर दीजिए। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के नए नियमों के अनुसार, अब सत्य की परिभाषा इस बात से तय नहीं होती कि तथ्य क्या हैं, बल्कि इस बात से तय होती है कि उस मैसेज के नीचे ‘Forwarded many times’ लिखा है या नहीं।

नया नियम: 11 ग्रुप में भेजो, सच पाओ

इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम का सबसे क्रांतिकारी नियम यह है कि अगर कोई खबर वैज्ञानिक रूप से बिल्कुल बकवास है, लेकिन उसे 11 अलग-अलग व्हाट्सएप ग्रुपों में भेज दिया जाए, तो वह विज्ञान के नियमों को धता बताकर ‘परम सत्य’ बन जाती है। उदाहरण के लिए, यदि आप लिखते हैं कि ‘नासा ने दी चेतावनी: दीपावली की रात आसमान में उड़ते दीयों की रोशनी से मंगल ग्रह पर रहने वाले एलियंस की आंखें चौंधिया गई हैं’, तो यह पूरी तरह सच है। इसके लिए आपको किसी टेलीस्कोप की जरूरत नहीं, बस अपनी उंगलियों को कष्ट देकर ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाना है।

यूनेस्को का ‘सर्वश्रेष्ठ’ सर्टिफिकेट मुफ्त उपलब्ध

इस नए फैक्ट-चेक विभाग के मुख्य कर्ता-धर्ता हमारे प्रिय ‘फूफा जी’ हैं, जो सुबह 5 बजे से ही ‘गुड मॉर्निंग’ के साथ ज्ञान की नदियां बहाना शुरू कर देते हैं। उनके अनुसार, यूनेस्को (UNESCO) दुनिया की एकमात्र ऐसी संस्था है जिसके पास कोई काम नहीं है, सिवाय भारत की हर छोटी-बड़ी चीज को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करने के। भारत का राष्ट्रगान, हमारी सड़कें, हमारे फूफा जी का खर्राटा—सब कुछ यूनेस्को द्वारा प्रमाणित है। अगर किसी ने इस पर सवाल उठाया, तो उसे सीधे ‘ग्रुप’ से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है। यही इस फैक्ट-चेक का सबसे त्वरित न्याय है।

भावनाओं का नया एल्गोरिदम

इस फैक्ट-चेकिंग की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दिमाग से नहीं, सीधे भावनाओं से काम करता है। अगर कोई मैसेज पढ़कर आपके अंदर का गुस्सा या रोमांच जाग उठता है, तो वह संदेश सौ प्रतिशत प्रमाणित है। तथ्य जांचने वाली संस्थाएं चाहे छाती पीटती रहें, लेकिन अगर हमारे ग्रुप एडमिन ने उस पर ‘सत्य वचन’ का स्टीकर चिपका दिया, तो आइंस्टीन की थ्योरी भी उसके सामने फेल है।

काक-वाणी की चेतावनी

काक-वाणी इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम को अपनी तीखी चोंच से सलाम करती है। इस यूनिवर्सिटी में तर्क करना वर्जित है और बुद्धि का इस्तेमाल करना पूरी तरह से गैर-कानूनी। यहां जो लोग ‘सोर्स क्या है?’ या ‘प्रूफ दिखाइए’ जैसे फालतू सवाल पूछते हैं, उन्हें तुरंत ग्रुप से ‘ब्लॉक’ कर दिया जाता है। इसलिए, अगली बार जब आपके पास आए कि ‘गले में इलायची बांधने से वाई-फाई की स्पीड बढ़ जाती है’, तो संकोच न करें। इसे तुरंत फॉरवर्ड करें, क्योंकि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया फैक्ट-चेक इसे पहले ही ‘सच्चा’ मान चुका है!

कागा जी