सोनिया गांधी की जीवनी: ‘मौन’ के रहस्य और ‘राजकुमार’ की अंतहीन रीलॉन्चिंग की महागाथा!

वाह! बीबीसी (BBC) की चिंता देखकर छाती गर्व से चौड़ी हो जाती है। उन्हें फिक्र है कि भारत के ‘सबसे शक्तिशाली राजनीतिक घराने’ की बहू, यानी सोनिया गांधी के संस्मरणों (Memoir) से कौन से दबे हुए राज बाहर आएंगे। ‘काक-वाणी’ के दफ्तर में जब यह खबर पहुंची, तो हमारे अनुभवी कौवों ने कांव-कांव कर हंसना शुरू कर दिया। अरे भाई, जिस देश के बच्चे-बच्चे को पता है कि दस साल तक देश का असली ‘सुपर पीएम’ कौन था, उसके लिए गोरी मीडिया को ‘खोजी पत्रकारिता’ का चश्मा लगाने की क्या जरूरत है?

पन्नों में ‘मौन’ की गूंज और रिमोट कंट्रोल का रहस्य

सोनिया जी की इस होने वाली किताब में क्या होगा? क्या इसमें उस ऐतिहासिक ‘रिमोट कंट्रोल’ का मॉडल नंबर लिखा होगा, जिससे दस साल तक मनमोहन सिंह जी के ‘मौन’ को नियंत्रित किया गया था? बीबीसी को उम्मीद होगी कि किताब में कोई अंतरराष्ट्रीय सनसनीखेज खुलासा होगा। लेकिन हमें यकीन है कि इसमें ‘त्याग’ की उस अनोखी परिभाषा का विस्तार होगा, जिसे पढ़कर आधुनिक कॉरपोरेट जगत के मैनेजर भी रो पड़ेंगे। बिना किसी संवैधानिक पद पर रहे, राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) के जरिए पूरे देश की सरकार कैसे चलाई जाती है, यह मैनेजमेंट के छात्रों के लिए एक अद्भुत अध्याय होगा।

‘राजकुमार’ की अंतहीन लॉन्चिंग के अनसुने किस्से

इस जीवनी का सबसे रोमांचक हिस्सा वह होना चाहिए, जिसका शीर्षक हो सकता है- “राहुल को नेता कैसे बनाएं: एक अंतहीन प्रयास”। इसमें विस्तार से दर्ज होना चाहिए कि कैसे एक होनहार युवक को हर दो साल बाद एक नए राजनीतिक अवतार में ‘लॉन्च’ किया जाता है, और देश की नासमझ जनता हर बार उसे ‘क्रैश’ कर देती है। क्या सोनिया जी इस राज से पर्दा उठाएंगी कि भरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अध्यादेश फाड़ने वाले राजकुमार के उस बचपने को उन्होंने ‘लीडरशिप क्वालिटी’ कैसे मान लिया था?

इतिहास के पन्नों में दबा ‘दामाद जी’ का संघर्ष

क्या इस किताब में हरियाणा और राजस्थान की उन बंजर जमीनों का भी कोई भावुक जिक्र होगा, जिन्हें ‘दामाद जी’ के कदम पड़ते ही सोना उगलने का वरदान मिल गया था? बीबीसी को शायद इसमें केवल ‘पारिवारिक स्नेह’ दिखे, लेकिन भारतीय करदाताओं को इसमें सिर्फ अपनी गाढ़ी कमाई का खेल दिखाई देगा।

खैर, ‘काक-वाणी’ का मानना है कि यह किताब चाहे जो भी दावा करे, इसका असली सार यही होगा कि ‘परिवार ही पार्टी है और पार्टी ही परिवार है।’ बाकी, लोकतंत्र तो बस एक साइड-बिजनेस है जो इस घराने के मनोरंजन के लिए चलता रहता है। बीबीसी वालों, ज्यादा उम्मीद मत पालो; अंत में इस किताब का निष्कर्ष यही निकलेगा कि देश की सारी समस्याओं की जड़ ईवीएम (EVM) और नरेंद्र मोदी हैं!


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कागा जी