हॉलीवुड का नया गुरु मंत्र: ‘दृश्यम’ से लेकर ‘महाराजा’ तक, अब गोरे लेंगे देसी फिल्मों का सहारा!

अरे सुनिए-सुनिए! ‘काक-वाणी’ के चटपटे और तीखे गलियारों से एक ऐसी खबर आई है, जिसे सुनकर हर भारतीय सिने-प्रेमी का दिल गदगद हो जाएगा। जमाना कितनी तेजी से बदल रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगा लीजिए कि एक दौर था जब हमारे बॉलीवुड वाले हॉलीवुड की फिल्मों के सीन फ्रेम-टू-फ्रेम उठाकर चिपका देते थे। लेकिन अब बाजी पूरी तरह से पलट चुकी है दोस्तों! अब गोरों को अपनी डूबती नैया पार लगाने के लिए भारतीय सिनेमा के ‘फ्रेश आइडिया’ और ‘मसालेदार थ्रिलर’ का सहारा लेना पड़ रहा है।

जब स्टीवन स्पिलबर्ग के देश में बजा ‘दृश्यम’ का डंका!

खबर एकदम पक्की और गरमा-गरम है कि भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक थ्रिलर फिल्म ‘दृश्यम’ (Drishyam) का अब ऑफिशियल हॉलीवुड रीमेक बनने जा रहा है। जी हां, वही 2 अक्टूबर को पणजी जाने वाली, पाव भाजी खाने वाली और स्वामी जी के सत्संग में बैठने वाली कहानी! अब बहुत जल्द लॉस एंजिल्स का कोई ‘माइकल’ या ‘जॉन’ अपनी फैमिली को क्रिमिनल केस से बचाने के लिए हॉलीवुड स्टाइल में पुलिस का दिमाग घुमाता दिखेगा। मलयालम, हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मंदारिन और कोरियन के बाद अब अंग्रेजी में ‘विजय सगांवकर’ का मास्टरमाइंड अवतार दुनिया देखेगी।

‘महाराजा’ और साउथ थ्रिलर्स का हॉलीवुड में खौफ

बात सिर्फ ‘दृश्यम’ तक ही सीमित नहीं है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में आई विजय सेतुपति की सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म ‘महाराजा’ (Maharaja) की कहानी और उसके माइंड-ब्लोइंग ट्विस्ट्स ने हॉलीवुड के बड़े-बड़े स्टूडियोज के होश उड़ा दिए हैं। हॉलीवुड के प्रोड्यूसर्स अब समझ चुके हैं कि असली सिनेमा सिर्फ वीएफएक्स (VFX) और गाड़ियों को हवा में उड़ाने में नहीं, बल्कि जमीन से जुड़ी कड़क कहानियों में है।

सुपरहीरो से ऊबा हॉलीवुड, अब चाहिए देसी मसाला!

ईमानदारी से कहें तो हॉलीवुड आजकल सुपरहीरो, स्पेस और मल्टीवर्स वाली घिसी-पिटी कहानियों से पूरी तरह से थक चुका है। वहां के दर्शकों को अब इंसानी जज्बात, पारिवारिक ड्रामा और दिमाग हिला देने वाले सस्पेंस की सख्त जरूरत है। और यह सब माल कहां मिलता है? जाहिर है, हमारे प्यारे भारतीय सिनेमा में! ‘कंतारा’, ‘आरआरआर’ और ‘दृश्यम’ जैसी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि कहानियों के असली राजा तो हम ही हैं।

तो दोस्तों, अगली बार जब भी आपका कोई दोस्त कहे कि “अरे यार, हमारी फिल्में तो कॉपी होती हैं”, तो उसके मुंह पर यह खबर दे मारना। ‘काक-वाणी’ का तो बस यही कहना है—“हमारा सिनेमा जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदाबाद रहेगा!” अब बस देखना यह है कि हॉलीवुड वाले हमारे केबल ऑपरेटर विजय सगांवकर की पाव-भाजी को बर्गर-पिज्जा में कैसे ढालते हैं!


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कागा जी