80 साल, आज़ादी की अनकही कहानियां और बॉलीवुड का ‘जय हिंद’: काक-वाणी का स्पेशल तड़का!

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका आपके पसंदीदा ठिकाने काक-वाणी पर। जब बात आज़ादी की हो और उसमें बॉलीवुड का तड़का न लगे, ऐसा तो हो ही नहीं सकता। हाल ही में WION की एक शानदार हेडलाइन ने हमारा ध्यान खींचा – “80 years, one nation & countless stories: How Bollywood showed us freedom”। इसे पढ़कर हमारे दिल का सिनेमाई कीड़ा जाग उठा। तो चलिए, आज बात करते हैं कि कैसे हमारी फिल्मों ने हमें आज़ादी का असली मतलब सिखाया है।

ब्लैक एंड व्हाइट दौर से रंगीन आज़ादी तक का सफर

सिल्वर स्क्रीन पर आज़ादी की जंग सिर्फ 1947 में शुरू नहीं हुई थी। आजादी के पहले और ठीक बाद के दौर में जब देश अपनी पहचान ढूंढ रहा था, तब दिलीप कुमार की ‘नया दौर’ और मनोज कुमार की ‘शहीद’ जैसी फिल्मों ने दर्शकों को देशभक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। ‘मदर इंडिया’ ने दिखाया कि कैसे आज़ादी के बाद देश को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए संघर्ष करना पड़ा। उस दौर की Bollywood Patriotic Movies ने देशवासियों को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। मनोज कुमार तो ऐसे छाए कि उनका नाम ही ‘भारत कुमार’ पड़ गया!

जब ‘लगान’ और ‘रंग दे बसंती’ ने बदला देशभक्ति का अंदाज

समय बदला और फिल्मों का मिजाज भी। 90 के दशक में ‘बॉर्डर’ फिल्म के ‘संदेशे आते हैं’ गाने ने हर हिंदुस्तानी की आंखें नम कर दीं। फिर आया आमिर खान की ‘लगान’ और ‘रंग दे बसंती’ का दौर। ‘रंग दे बसंती’ ने दिखाया कि आज़ादी सिर्फ अंग्रेजों से लड़ना नहीं, बल्कि अपने देश की कमियों के खिलाफ आवाज उठाना भी है। इस फिल्म को देखकर युवाओं ने महसूस किया कि भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद सिर्फ इतिहास की किताबों के पन्नों में नहीं, बल्कि उन सबके भीतर जिंदा हैं। इन फिल्मों ने साबित किया कि आज़ादी की लड़ाई आज भी जारी है, बस दुश्मन और मैदान बदल गए हैं।

नया भारत, नया सिनेमा: ‘हाउ इज द जोश?’

आज का युवा अलग है, और उसकी देशभक्ति का तरीका भी काफी कूल और आक्रामक है। अब हमारी फिल्मों में देशभक्ति सिर्फ आंसुओं में नहीं बहती, बल्कि ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के ‘हाउ इज द जोश?’ और ‘शेरशाह’ के ‘ये दिल मांगे मोर’ में दहाड़ती है। आधुनिक सिनेमा में आज़ादी का मतलब है – देश की सुरक्षा के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा और अपनी सेना पर अटूट गर्व महसूस करना।

तो दोस्तों, WION की यह बात बिल्कुल सच है। इन 80 सालों में बॉलीवुड ने हमें सिर्फ मनोरंजन नहीं परोसा, बल्कि हर उस लम्हे को जीने का मौका दिया जिसे हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें तोहफे में दिया था। काक-वाणी की तरफ से भारतीय सिनेमा के इस बेमिसाल सफर को एक कड़क सैल्यूट! आपका इस बारे में क्या सोचना है? आपकी पसंदीदा देशभक्ति फिल्म कौन सी है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं!


संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें

कागा जी