तुम और मैं
एक गर्म दिन के बाद, आज शाम में रोहित अपने कमरे में सो रहा था। उसके पीछे से एक आवाज आ रही थी जो दिन-दूनी सी लगती थी। एक बोली आयी – “रोहित, तुम सो रहे हो?”
रोहित अपने मुंह को फड़काते हुए उठ खड़ा हुआ और देखता है कि उसकी माँ अपने कमरे से आ रही है।
“हाँ माँ, मैं सो रहा था।”
“तुम खुश नहीं लगते हो। क्या हुआ?”
“अच्छा नहीं लग रहा है माँ।”
“क्यों बेटा?”
“बस ऐसा ही माँ, कुछ खास नहीं।”
“अच्छा तुम फिर सो जाओ, कल कुछ अच्छा होगा।”
अगले दिन, रोहित नेहा से मिलने गया जो उसकी कॉलेज की महिलाओं में से थी। रोहित उससे नहीं मिल पा था क्योंकि उसका दिल माँ के चिंता में उलझा हुआ था। रोहित माँ को देखने ही वापस चला गया।
माँ ने रोहित की प्रतीक्षा की और नहीं रुकी कि उसने अपने मंदिर से उसके लिए कुछ पढ़ कर दिया। उसमें लिखा था, “तेरी माँ तेरे लिए हमेशा उस बादशाह की तरह होती है जो अपने सुपुत्र के लिए सब कुछ कर सकता है। तुम सभी कुछ हो जाओगे, लेकिन तुम्हारी माँ तुम्हें हमेशा बचाने की कोशिश करेगी।”
रोहित इसे पढ़ते ही रोने लगा और माँ ने उसे समझाया कि वह दोनों एक दूसरे के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। बाद में, जब रोहित ने नेहा से मिलने जाने का फिर से प्रयास किया तो वह उससे मिलने होटल जा बैठी।
रोहित उससे बात करते हुए कहता है, “तुम्हारे बिना मैं जीना नहीं चाहता हूँ।”
“लेकिन तुमसे कुछ अच्छा होना चाहिए ना।”
“हमारे लिए, तुम्हारे लिए और मेरे लिए, हमेशा एक दूसरे के लिए।”
“और अगले बार, जब तुम पड़ने जाओगे, मुझसे सहायता मत करना।”
रोहित अब समझ गया था कि उसे अपनी माँ का साथ और महत्वपूर्ण हमेशा रखना होगा। वह अपने मन में एक फैसला ले लिया कि वह अब से सही तरीके से अपनी माँ का ध्यान रखेगा।
“उधर, जब नेहा वापस घर पहुँची तो उसने उसकी माँ से मिलना चाहा। वह उससे मिलते हुए पूछती है, “रोहित अच्छा नहीं लग रहा है। उसका कुछ ख्याल नहीं है।”
माँ ने कहा, “आप चिंता मत कीजिए। औरों के साथ होना हमेशा अच्छा होता है, लेकिन माँ हमेशा सही तरीके से होती है।”
नेहा समझती है और अपने घर वापस जाती है। उसने रोहित को फोन लगाया और कहा, “तुम मेरे लिए खास हो।”
रोहित ने कहा, “तुम मेरे लिए भी बहुत खास हो।”
उसने पिछले दिन उसके साथ क्या हुआ बताया और माँ की प्रेरणा से वह जानता है कि उसे अपनी माँ का सारे वक़्त और महत्वपूर्ण रखना चाहिए।
रोहित और नेहा एक दूसरे के लिए बने हुए थे लेकिन वह इस तक पहुंच नहीं पा रहा था कि उसे अपनी माँ का ध्यान भी रखना पड़ेगा।
वह जानता था कि उस दिन से उसका जीवन बदल गया था। वह अब अपनी माँ के साथ हर पल बने रहने के लिए तत्पर था।
इस तरह से, रोहित और नेहा एक दूसरे के लिए बने रहते हुए अपने जीवन को आगे बढ़ाते थे। वे एक दूसरे का बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा थे लेकिन वह इस बात का भी संज्ञान ले गए थे कि उन्हें अपनी माँ का सारे वक़्त और महत्वपूर्ण रखना होगा।