वाह! क्या जादुई फैसला आया है। भारतीय न्यायपालिका और सत्ता के रसूखदारों के आपसी प्रेम को देखकर तो हमारी कौआ प्रजाति की आँखों में भी खुशी के आँसू आ गए। जब तरुण तेजपाल साहब को कोर्ट ने ‘सम्मानपूर्वक’ बरी किया, तो लगा कि देश में सचमुच ‘अच्छे दिन’ केवल नेताओं के लिए ही नहीं, बल्कि उनके रसूखदार मित्रों के लिए भी आ चुके हैं। आखिर, न्याय की देवी की आँखों पर बंधी पट्टी भी कभी-कभी रसूख की चमक देखकर थोड़ी ढीली हो ही जाती है।
पावर का ‘शिल्ड’ और रसूखदारों का सुरक्षा कवच
हम जैसे आम कौए तो अगर किसी मुंडेर से एक टुकड़ा रोटी भी उठा लें, तो कानून की लाठी तुरंत हरकत में आ जाती है। लेकिन जब बात वीआईपी क्लब के रसूखदारों की हो, और मामला लिफ्ट के अंदर की ‘असुविधाजनक’ हरकतों का हो, तो कानून की बारीकियाँ इतनी महीन हो जाती हैं कि उसमें से बड़े से बड़ा हाथी भी साफ बचकर निकल जाए।
सत्ता की राजनीति का असली सौंदर्य यही है—चाहे सरकार इस तरफ की हो या उस तरफ की, वीआईपी क्लब के सदस्यों के लिए एक अदृश्य ‘सुरक्षा कवच’ हमेशा चालू रहता है। राजनीतिक दल, जो आमतौर पर टीवी डिबेट्स में महिला सुरक्षा पर गला फाड़कर छाती पीटते हैं, इस फैसले पर ऐसे सुस्ता रहे हैं जैसे किसी गहरी नींद में हों। आखिर, रसूखदारों के आपसी रिश्ते किसी भी दलीय सीमा से ऊपर जो होते हैं!
दोषी कौन? पीड़ित या खुद हमारा लाचार सिस्टम?
इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि इस देश में पीड़ित होना भी एक बेहद जोखिम भरा काम है। अगर आपके पास सत्ता का वरदहस्त और महंगे वकीलों की फौज नहीं है, तो बेहतर होगा कि आप अपनी पीड़ा को जेब में रखकर घूमते रहें। तेजपाल साहब ने तो कभी दूसरों के बंद कमरों की पोल खोलकर ‘तहलका’ मचाया था, आज उनके खुद के बरी होने पर पूरे सिस्टम में ‘राहत का तहलका’ मच रहा है।
इस पूरे नाटक में सबसे मनोरंजक दृश्य रहा राजनीतिक दलों का दोगलापन। सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों ही ‘कानून अपना काम कर रहा है’ का वह घिसा-पिटा राग अलाप रहे हैं, जिसे सुनकर खुद कानून भी अपना सिर पकड़ ले। सच तो यह है कि जब बात सत्ता और रसूख की आती है, तो सारे सिद्धांत और नैतिकता केवल चुनावी घोषणापत्रों में बंद होकर रह जाते हैं।
काक-वाणी का तो सीधा और सपाट मानना है—यदि आपकी जेब भारी है और संबंध ऊंचे हैं, तो कानून की धाराएं आपके सामने पानी भरेंगी। बधाई हो तेजपाल जी, और विशेष बधाई हो उस सत्ता को जो हर ‘तहलके’ को शांति में बदलना बखूबी जानती है!
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