वाह रे ब्लूमबर्ग! तुम्हारी इस दिव्य और सूक्ष्म राजनीतिक दृष्टि को ‘काक-वाणी’ का शत-शत नमन। जब पूरी दुनिया भारतीय राजनीति में ‘चाणक्य नीति’, ‘डबल इंजन’ और ‘गारंटी’ के फेर में उलझी थी, तब न्यूयॉर्क के वातानुकूलित दफ्तरों में बैठे बुद्धिजीवियों ने भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती को खोज निकाला है। और वह चुनौती कोई आर्थिक मंदी या वैश्विक संकट नहीं, बल्कि ‘कॉकरोच (तिलचट्टा) आंदोलन’ है! जी हां, दिल थाम कर बैठिए, क्योंकि अब भारत की सत्ता के गलियारों में कीट-पतंगों की क्रांति आ चुकी है।
पश्चिमी चश्मे का नया मोतियाबिंद: कॉकरोच क्रांति
ब्लूमबर्ग की इस गहन खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में अब एक ऐसा अदृश्य आंदोलन खड़ा हो गया है जो परमाणु हमले में भी जिंदा रहने वाले तिलचट्टों की तरह ढीठ है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो वैश्विक मंचों पर बड़े-बड़े राष्ट्राध्यक्षों से हाथ मिलाते हैं, वे आजकल शायद रात को सोते समय अपनी चादर के कोने चेक करते होंगे कि कहीं कोई ‘कॉकरोच’ उनकी सत्ता के सिंहासन के पाए को न कुतर रहा हो। विदेशी पत्रकारों की इस उपमा-शक्ति की दाद देनी पड़ेगी। उन्हें भारतीय विपक्ष और आलोचकों में अब ‘फेनिक्स’ पक्षी नहीं, बल्कि रसोईघर का वह जीव नजर आ रहा है, जो लाख ‘हिट’ छिड़कने के बाद भी सिंक के नीचे से मूंछें हिलाता हुआ बाहर आ जाता है।
चाणक्य नीति बनाम तिलचट्टा तंत्र
दिल्ली के सत्ता-गलियारों में इस नई ‘थ्योरी’ के बाद हड़कंप मच गया है। भाजपा के रणनीतिकारों ने विपक्ष से निपटने के लिए जनसभाओं, जांच एजेंसियों और सोशल मीडिया वॉरियर्स का चक्रव्यूह तैयार किया था। लेकिन उन्हें क्या पता था कि मुकाबला इंसानों से नहीं, बल्कि उस जीव से है जो डायनासोर के युग से आज तक बिना किसी ‘विजन डॉक्यूमेंट’ के जीवित है। इस तथाकथित ‘कॉकरोच आंदोलन’ की सबसे बड़ी यूएसपी यही है कि इसका कोई एक चेहरा नहीं है। आप एक पर चप्पल मारेंगे, दूसरा नाली से निकल आएगा। हमारे टीवी चैनलों के एंकर भी अब गंभीर संकट में हैं कि इस नई आफत पर ‘नेशन वांट्स टू नो’ वाली डिबेट कैसे की जाए? क्या अब स्क्रीन पर ‘एंटी-नेशनल पेस्ट कंट्रोल’ जैसे हैशटैग चलेंगे?
वैश्विक चिंता और हमारी देसी लक्ष्मण रेखा
इस बेहद गंभीर वैश्विक खुलासे के बाद अब देखना यह होगा कि गृह मंत्रालय इस राष्ट्रीय सुरक्षा के नए ‘थ्रेट’ से कैसे निपटता है। क्या अगले बजट में देश की सीमाओं के बजाय ‘लक्ष्मण रेखा’ चाक को खरीदने के लिए विशेष फंड आवंटित किया जाएगा? जो भी हो, ब्लूमबर्ग ने यह साबित कर दिया है कि भारत को समझने के लिए आपको राजनीति शास्त्र की नहीं, बल्कि कीट विज्ञान (Entomology) की डिग्री की जरूरत है। मोदी जी की चिंता वाकई जायज है, क्योंकि इतिहास गवाह है—डायनासोर मिट गए, पर कॉकरोच आज भी शान से घूम रहे हैं!
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