नमस्कार दोस्तों! ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे उस महान विश्वविद्यालय की, जिसकी कोई भौतिक दीवार नहीं है, कोई फीस नहीं है, लेकिन यहाँ के स्नातकों का ज्ञान ब्रह्मांड के पार तक फैला है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की, जहां हर सुबह सूर्योदय से पहले ही ज्ञान की ऐसी गंगा बहती है कि नासा और यूनेस्को वाले भी अपना सिर पकड़कर बैठ जाते हैं। आइए, आज हम इस ज्ञान-गंगा के कुछ वायरल दावों की कड़वी (और मजेदार) सच्चाई का विश्लेषण करते हैं।
यूनेस्को का ‘सर्वश्रेष्ठ’ राष्ट्रीय पुरस्कार
सबसे पहला और सबसे पुराना वायरल दावा, जो हर तीन महीने में पुनर्जीवित हो जाता है, वह है यूनेस्को द्वारा भारतीय राष्ट्रगान या हमारी संस्कृति को ‘सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करना। व्हाट्सएप के कुलपति इतनी सटीकता से यह दावा पेश करते हैं कि खुद यूनेस्को के महानिदेशक को भी लगने लगता है कि शायद उन्होंने कभी सोते समय इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए होंगे। सच तो यह है कि यूनेस्को के पास ऐसे फालतू काम करने का समय नहीं है, लेकिन हमारे व्हाट्सएप वीरों के पास इस मैसेज को 11 ग्रुपों में भेजने का पूरा समय है।
नासा के वैज्ञानिक और घरेलू नुस्खे
इसके बाद नंबर आता है नासा (NASA) का। बेचारे नासा के वैज्ञानिक अंतरिक्ष में टेलिस्कोप लगाने और मंगल ग्रह पर पानी ढूंढने में व्यस्त हैं, और यहाँ व्हाट्सएप पर वे हर सुबह तुलसी के पत्ते चबाकर कैंसर का इलाज ढूंढ रहे होते हैं। कभी दावा किया जाता है कि शंख बजाने से कोरोना वायरस भाग जाता है, तो कभी कहा जाता है कि घर के कोने में कपूर रखने से ऑक्सीजन का स्तर बढ़ जाता है। जीव विज्ञान और भौतिकी की ऐसी धज्जियां उड़ते देख आइजैक न्यूटन भी स्वर्ग में सोच रहे होंगे कि उन्होंने गुरुत्वाकर्षण की खोज क्यों की, जब असली विज्ञान तो व्हाट्सएप ग्रुप्स में छुपा था।
नींबू-मिर्ची और थर्मल एनर्जी का विज्ञान
व्हाट्सएप वैज्ञानिकों के अनुसार, दरवाजे पर नींबू-मिर्ची टांगने से केवल बुरी नजर ही नहीं बचती, बल्कि इससे निकलने वाली ‘थर्मल वेव्स’ वातावरण के सारे बैक्टीरिया को नष्ट कर देती हैं। अल्बर्ट आइंस्टीन ने अपनी थ्योरी शायद इसी वैज्ञानिक चमत्कार को देखकर सोची होगी! इस यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों के पास हर उस बीमारी का इलाज है, जिसका तोड़ एम्स के डॉक्टर भी नहीं ढूंढ पाए। सुबह खाली पेट गर्म पानी पीने से लेकर रात को तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने तक, इनके पास हर मर्ज की चमत्कारी दवा उपलब्ध है।
11 लोगों को भेजें और चमत्कार देखें
इस पूरी ज्ञान-गंगा का सबसे खतरनाक हिस्सा होता है इसके अंत में मिलने वाली चेतावनी: “इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी। न भेजने पर भारी नुकसान हो सकता है।” इस डर से हमारे भोले-भाले ताऊजी और फूफाजी बिना सोचे-समझे इसे पूरे खानदान के ग्रुप में फॉरवर्ड कर देते हैं।
निष्कर्ष: अगली बार जब आपके पास ऐसा कोई ‘चमत्कारी’ मैसेज आए, तो फॉरवर्ड बटन दबाने से पहले अपने दिमाग का इस्तेमाल करें। याद रखें, ज्ञान बांटने से बढ़ता है, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का ‘ज्ञान’ बांटने से सिर्फ देश का डेटा और आपका दिमाग खराब होता है।