Title: अपनी माँ की सेवा
एक गांव में एक युवक रहता था जिसे अपनी माँ से बहुत प्यार था। वह अपनी माँ के लिए हमेशा संतुष्टि और खुशी के लिए कुछ न कुछ करता रहता था। उसकी माँ एक किसान थी। वह उनके लिए प्यार और सम्मान का एक आदर्श थीं। वह हमेशा अपने ऑफिस में काम करता रहता था लेकिन शाम को वह अपनी माँ के पास जाता था।
एक दिन वह अपने ऑफिस से वापस आता हुआ देखा कि उसकी माँ खेत में छोटी-छोटी झाड़ियों पर काम कर रही हैं। वह जाकर उनसे मिला और पूछा कि दिन में आपको इतना काम क्यों करना पड़ता है। उसकी माँ उत्तर नहीं दिया लेकिन उसने उसे आशीर्वाद देकर कहा कि आप अपने काम में लग जाओ, मुझे यह सब करने की ज़रूरत है।
उसकी माँ की इस बात से उसे काफी परेशानी हुई। उसे यह बात समझ में नहीं आई कि उसकी माँ को इतना काम करना क्यों पड़ता है। उसे यह सोचते रहने के बाद भी कुछ खास करने का मूड नहीं था।
फिर एक दिन उसे उसकी माँ के द्वारा जड़ से जरूरी कामों में मदद करते हुए देखा गया। वह देखा कि उनकी माँ अधिकतर कामों को हाथ से ही करती हैं। वह उन्हें पानी के एक बर्तन को उठाना, झाड़ू से खेतों को साफ़ करना, नाबाद की छोटी-छोटी पौधों के बीच से निकलना आदि काम करने में देखा गया।
इससे उसके मन में एक संदेह उत्पन्न हुआ। क्या उसकी माँ इतना काम करती हुई वर्षों से करती रही हैं। क्या उसे इस सच्चाई से कुछ सीखने की आवश्यकता है। उसे उसकी माँ के पौधे के साथ एक बैठक ने में यह सोचते रहते हुए एक आदर्शवादी नजरिया मिल गया।
वह तब से जब तक उसकी माँ अंतिम सांस नहीं ले लेती थी उसे उसकी माँ की इज्जत बढ़ाने का प्रयास करना शुरू कर दिया था। उसने उसकी माँ के साथ मजबूती से खेती की देखरेख की। उसने उन्हें न केवल अपनी कमाई का अंश अलग करने की सलाह दी बल्कि उन्हें एक सही कृषि पद्धति बताई।
उसकी माँ उसके समर्थन में आई और उसे अपना पाठ पढ़ाने दिया। उसका जोश बढ़ता हुआ वह अपनी माँ के साथ काम करने लगा और उसे यह खुशी मिली कि वह अपनी माँ के साथ काम करके उन्हें सुख दे सकता है।
उसकी माँ से उसका दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल गया था। वह अधिक नए और सुखद समय को आसानी से पा सकता था। उसने अपनी माँ के साथ सादे जीवन का आनंद उठाना और वह मिलकर काम करने का अधिक समय निकालना शुरू कर दिया।
इस तरह से वह अपनी माँ की सेवा करते हुए अपना दैनिक जीवन चलाता रहा। उसे एक दिन अचानक फीवर हो गया था और उसे बहुत कमज़ोरी महसूस होने लगी थी। उसने खुद को संभालते हुए दवा ली और अपने बेड पर बैठ गया।
दरवाजा खींचते हुए उसकी माँ ने अपने बेटे को देखा और उसे उसके साथ जाने के लिए कहा। उसने अपने बेटे को अस्पताल ले जाने के लिए लिया और वहाँ उसे उसका सर्वेक्षण कराने के लिए भेजा गया।
उसे ठंड लग रही थी लेकिन उसने उसकी माँ को देखा और उसे अपनी जड़ से लगाव बढ़ाया। उसकी माँ ने उसे दवा दी और उसे उसके साथ अस्पताल में अपने लिए प्राप्त किए नाशपाती से खिलाया।
यह उदाहरण सोचने वाला है कि अपनी माँ की सेवा करना अपने परिवार और समाज के लिए एक समाधान होता है। इससे हम न केवल उन्हें खुश रखते हैं बल्कि आम तौर पर लोग गलत समझते हैं कि धन सफलता का मापदंड है। यह एक समझदार और श्रद्धालु व्यक्ति के सशक्तिकरण का एक सही साधन है।