WhatsApp यूनिवर्सिटी के ‘नोबेल प्राइज’ विजेता और नासा की ‘दिवाली फोटो’ का सच

सुबह की पहली किरण के साथ जब आपके स्मार्टफोन की घंटी बजती है, तो समझ लीजिए कि ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ का पहला लेक्चर शुरू हो चुका है। “इस संदेश को 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी” से लेकर “नासा ने भारत की दिवाली वाली तस्वीर जारी की है” तक, ज्ञान का ऐसा अद्भुत सागर बहता है कि दुनिया भर के वैज्ञानिक भी अपनी डिग्रियां गंगा में विसर्जन करने को मजबूर हो जाएं। हमारे इस विभाग ‘काक-वाणी’ में आज हम ऐसे ही कुछ महान वायरल दावों की कड़वी और मजेदार सच्चाई का विश्लेषण करेंगे।

यूनेस्को का ‘सर्वश्रेष्ठ’ राष्ट्रीय गान और नासा की दिवाली

हमारे व्हाट्सएप फॉरवर्डर्स की सबसे बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि यह है कि वे बिना किसी आधिकारिक बैठक के, यूनेस्को (UNESCO) से भारत के राष्ट्रगान को “दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान” घोषित करवा देते हैं। यह दावा पिछले दस सालों से हर स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर इस तरह वायरल होता है, मानो यूनेस्को के दफ्तर में भारतीय राष्ट्रगान को सर्टिफिकेट बांटने के अलावा और कोई काम ही न बचा हो। इसके बाद नंबर आता है अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का। नासा हर साल दिवाली पर अंतरिक्ष से भारत की ऐसी रंग-बिरंगी तस्वीर खींचती है, जिसमें पूरा देश किसी सतरंगी रंगोली की तरह चमकता दिखता है। भले ही वह तस्वीर किसी नौसिखिए ग्राफिक्स डिजाइनर की कलाकारी हो, लेकिन हमारे फॉरवर्डर्स के लिए वह नासा का ‘परम सत्य’ बन जाती है।

कैंसर का इलाज चम्मच भर हल्दी और गर्म पानी में!

चिकित्सा विज्ञान ने दशकों की रिसर्च और अरबों डॉलर खर्च करके जो इलाज आज तक नहीं ढूंढा, वह हमारे व्हाट्सएप ग्रुप के ‘शर्मा जी’ सुबह की चाय पीते-पीते खोज लेते हैं। “गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से कैंसर जड़ से खत्म” या “नाक में दो बूंद सरसों का तेल डालने से हर वायरस तड़प-तड़प कर दम तोड़ देता है” जैसे क्रांतिकारी नुस्खे रोजाना बांटे जाते हैं। ऐसे नुस्खे पढ़कर कभी-कभी लगता है कि बड़े-बड़े डॉक्टरों को तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए और व्हाट्सएप ग्रुप के एडमिन को चिकित्सा का नोबेल पुरस्कार सौंप देना चाहिए।

फॉरवर्ड बटन की उंगली और कड़वी सच्चाई

सच्चाई यह है कि इन वायरल दावों के पीछे कोई वैज्ञानिक या ऐतिहासिक आधार नहीं होता। इसके पीछे सिर्फ और सिर्फ ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाने की तीव्र उंगली की खुजली होती है। लोग बिना सोचे-समझे, बिना किसी तथ्य की जांच किए, इन संदेशों को ऐसे बांटते हैं जैसे मंदिर का मुफ्त प्रसाद हो। इसलिए, अगली बार जब आपके पास ऐसा कोई ‘रहस्यमयी’ संदेश आए, तो उसे आगे बढ़ाने से पहले अपने विवेक का इस्तेमाल करें। याद रखें, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी आपको मुफ्त डेटा तो दे सकती है, लेकिन सामान्य ज्ञान और समझदारी नहीं।

कागा जी