सिनेमाई ‘विस्फोट’ से राजनीति में ‘महा-क्रांति’: थलपति विजय का ‘फ्लॉप-प्रूफ’ पॉलिटिकल मॉडल!

वाह! क्या खबर है! अंग्रेजी अखबार की यह हेडलाइन पढ़कर हमारी ‘काग-दृष्टि’ धन्य हो गई। लिखा है—”तमिलनाडु का विजय मॉडल भारत में राजनीतिक उथल-पुथल (डिस्ट्रप्शन) मचा सकता है।” सचमुच, यह विश्लेषण पढ़कर देश के सारे राजनीति शास्त्री और समाजशास्त्री अपनी डिग्रियां गंगा में बहाने की सोच रहे हैं। तमिलनाडु के इतिहास में किसी ‘अभिनेता’ का राजनीति में आना… ओह, यह तो बिल्कुल वैसा ही है जैसे रेगिस्तान में अचानक बर्फबारी हो जाए! एकदम अनोखा, अप्रत्याशित और पहले कभी न देखा गया प्रयोग!

थलपति का ‘थियेटर’ और भारतीय राजनीति का ‘स्क्रीनप्ले’

हम तो अज्ञानी थे जो सोच रहे थे कि एमजीआर, करुणानिधि, जयललिता, विजयकांत और कमल हासन तो शायद किसी दूसरी दुनिया से आए थे! अब जाकर महान विश्लेषकों ने हमें समझाया है कि ‘थलपति’ विजय ने जो किया है, वही असली ‘पॉलिटिकल डिस्ट्रप्शन’ है। इस अद्भुत मॉडल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें आपको किसी उबाऊ नीतिगत दस्तावेज या मैनिफेस्टो की जरूरत नहीं होती। बस एक शानदार बैकग्राउंड म्यूजिक (BGM), एक धीमी गति (स्लो-मोशन) वाली एंट्री और तीन-चार कड़क डायलॉग फेंकिए, और राज्य की आधी समस्याएं तो वैसे ही थर-थर कांपने लगेंगी।

‘पॉलिटिकल डिस्ट्रप्शन’ या सिर्फ एक और ‘री-मेक’ फिल्म?

विजय साहब की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कझगम’ (TVK) का यह मॉडल वाकई क्रांतिकारी है। दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में बैठे विश्लेषक हैरान हैं कि बिना किसी स्पष्ट विचारधारा के सिर्फ ‘फैन क्लब’ के दम पर पार्टी कैसे बन गई? अरे भाई, जब स्क्रीन पर नायक के एक मुक्के से पचास गुंडे उड़ सकते हैं, तो एक रैली से पूरी प्रशासनिक व्यवस्था क्यों नहीं सुधर सकती? आखिर हमारी राजनीति भी तो पांच साल का एक लंबा थियेटर ही है, बस फर्क इतना है कि इसका टिकट हमें ‘वोट’ के रूप में चुकाना पड़ता है। अगर सरकार ठीक से नहीं चली, तो क्लाइमेक्स में विलेन (विपक्ष) को हवा में उड़ाकर बजट घाटे को ठीक कर दिया जाएगा।

घोषणापत्र में सिर्फ ‘सिग्नेचर स्टेप’

सच्चाई तो यह है कि भारतीय राजनीति को अब उबाऊ बौद्धिक बहसों की नहीं, बल्कि ‘सिग्नेचर स्टेप्स’ की जरूरत है। अगर संसद में महंगाई और बेरोजगारी पर बहस के दौरान विपक्षी दल हंगामा करें, तो हमारे थलपति को बस एक बार कॉलर खड़ा करना चाहिए और पूरा विपक्ष खामोश! ‘काक-वाणी’ का मानना है कि इस नए मॉडल से देश के युवाओं को भारी रोजगार मिलेगा—कम से कम हर चौराहे पर 100 फीट ऊंचे कट-आउट लगाने और उन पर दूध चढ़ाने का काम तो पक्का ही है। तो आइए, पॉपकॉर्न तैयार रखिए, क्योंकि देश का लोकतंत्र अब पूरी तरह से ‘सिनेमैटिक’ और टैक्स-फ्री होने जा रहा है!


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कागा जी