सुबह की पहली किरण के साथ जब आपके फोन की घंटी बजती है, तो समझ जाइए कि ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के किसी मानद प्रोफेसर ने अपनी ज्ञान की गंगा बहा दी है। इस अद्भुत विश्वविद्यालय में न कोई परीक्षा होती है, न कोई फीस लगती है, बस एक ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाने की योग्यता होनी चाहिए। काक-वाणी के इस विशेष अंक में, हम लेकर आए हैं इस हफ्ते के सबसे सनसनीखेज और ‘101% प्रामाणिक’ (व्हाट्सएप के अनुसार) दावों का एक मजेदार फैक्ट-चेक।
दावा नंबर 1: यूनेस्को ने भारतीय राष्ट्रगान को घोषित किया ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’
सच्चाई: यह दावा इंटरनेट के इतिहास में इतना पुराना हो चुका है कि अब यूनेस्को के अधिकारी भी इसे देखकर अपना सिर पकड़ लेते होंगे। हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर यह संदेश ऐसे वायरल होता है जैसे यूनेस्को के पास दुनिया में और कोई काम ही नहीं है। सच तो यह है कि यूनेस्को ऐसी कोई प्रतियोगिता आयोजित ही नहीं करता। लेकिन हमारे व्हाट्सएप के शूरवीर इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं। उनके लिए तो यूनेस्को का मतलब ही ‘यूनाइटेड नेशंस संस्कारी कौंसिल’ है।
दावा नंबर 2: नींबू पानी और गरम पानी पीने से कैंसर का काम तमाम
सच्चाई: चिकित्सा विज्ञान ने दशकों की रिसर्च और अरबों डॉलर फूंकने के बाद जो कीमोथेरेपी खोजी है, उसे हमारे व्हाट्सएप के ‘घरेलू डॉक्टरों’ ने रसोई के कोने में रखे नींबू और गरम पानी से रिप्लेस कर दिया है। मैसेज में लिखा होता है—”इसे छुपाकर न रखें, तुरंत 10 लोगों को भेजें।” भाई साहब, अगर सिर्फ मैसेज फॉरवर्ड करने और नींबू चूसने से कैंसर ठीक हो जाता, तो दुनिया के सारे बड़े अस्पताल कब के बंद होकर वहां पतंजलि के योग शिविर खुल चुके होते।
दावा नंबर 3: नासा ने जारी की दिवाली के दिन भारत की जगमगाती तस्वीर
सच्चाई: हर साल दिवाली के अगले दिन नासा की यह ‘सतरंगी’ तस्वीर देखना भारतीय नागरिकों का डिजिटल कर्तव्य बन चुका है। भले ही वह तस्वीर किसी नौसिखिए ने फोटोशॉप पर रंगों की होली खेलकर बनाई हो, लेकिन व्हाट्सएप ग्रुप के फूफाजी उसे नासा के सैटेलाइट की लाइव क्लिक बताते हैं। नासा वाले खुद परेशान हैं कि उनके पास ऐसा कौन सा कैमरा आ गया जो सिर्फ भारत की सीमाओं को ही रात के अंधेरे में चमका देता है!
निष्कर्ष: काक-वाणी की ज्ञान की बात
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के इन दावों को सच मानना उतना ही सेहतमंद है जितना कि जहरीली शराब पीना। इसलिए, अगली बार जब कोई आपको “नासा की रिपोर्ट” या “यूनेस्को का सर्टिफिकेट” भेजे, तो उसे फॉरवर्ड करने के बजाय सीधे डिलीट बटन का मार्ग दिखाएं। याद रखिए, हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती और हर ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ वाला मैसेज सच नहीं होता। अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें, अफवाहों के वायरस से बचें!