सुबह की पहली किरण के साथ जब आपके फोन की घंटी बजती है और स्क्रीन पर ‘गुड मॉर्निंग’ के गुलाब के फूल के साथ ‘यूनेस्को द्वारा घोषित सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ का संदेश चमकता है, तो समझ लीजिए कि आप ‘WhatsApp यूनिवर्सिटी’ के दीक्षांत समारोह में प्रवेश कर चुके हैं। यहाँ ज्ञान की ऐसी अविरल गंगा बहती है, जिसमें नासा के वैज्ञानिक भी रोज डुबकी लगाकर अपने शोध पत्र ठीक करते हैं।
नासा और यूनेस्को का ‘भारतीय कनेक्शन’
हमारे पारिवारिक ग्रुप्स के डेटाबेस के अनुसार, यूनेस्को (UNESCO) के पास दुनिया में और कोई काम नहीं बचा है। उनका मुख्य मुख्यालय पेरिस में नहीं, बल्कि सीधे हमारे ताऊजी के कीपैड पर ट्रांसफर हो चुका है। कभी हमारी हरी चटनी को ‘विश्व की सर्वश्रेष्ठ चटनी’ का पुरस्कार मिल जाता है, तो कभी हमारे मोहल्ले के शर्मा जी के खर्राटों को नासा अंतरिक्ष की सबसे रहस्यमयी ध्वनि घोषित कर देता है। नासा के वैज्ञानिक इतने खाली हैं कि वे हर दिवाली पर अंतरिक्ष से केवल भारत के दीयों की चमचमाती तस्वीर खींचने के लिए कैमरे पर लेंस साफ करते रहते हैं, चाहे उस दिन आसमान बादलों से क्यों न ढका हो!
घरेलू नुस्खों से ‘अमरत्व’ की प्राप्ति
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान सालों की मेहनत और अरबों डॉलर खर्च करके जो दवाइयां नहीं बना पाता, हमारे ग्रुप के ‘ज्ञानवीर’ उसे सुबह खाली पेट गर्म पानी में नींबू और चुटकी भर हल्दी मिलाकर चुटकियों में हल कर देते हैं। WhatsApp यूनिवर्सिटी के इन ‘अंडरग्राउंड’ डॉक्टरों के अनुसार, कैंसर से लेकर गंजेपन तक का इलाज बस एक फॉरवर्डेड मैसेज की दूरी पर है। डॉक्टरों की एमबीबीएस की डिग्री तो बस दीवार की शोभा बढ़ाने के लिए है, असली न्यूरोसर्जन तो ‘वर्मा जी एडमिन’ हैं, जो यह दावा करते हैं कि कान में प्याज का रस डालने से याददाश्त कंप्यूटर से भी तेज हो जाती है।
सत्य की खोज और ‘फॉरवर्ड’ की उतावली
इस डिजिटल युग में पुरानी कहावत ‘झूठ बोले कौआ काटे’ बदलकर अब ‘झूठ बोले WhatsApp फॉरवर्ड’ हो चुकी है। यहाँ ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ (Forwarded many times) का टैग किसी संदेश को वेद वाक्य बनाने के लिए काफी है। ‘काक-वाणी’ आपसे विनम्र अनुरोध करती है कि जब अगली बार आपको कोई संदेश मिले कि ‘प्लास्टिक के पत्तागोभी’ से लोग बीमार हो रहे हैं, तो कृपया अपनी बुद्धि की खिड़की खोलें। इस वायरल अफवाहों के बाजार में समझदारी ही सबसे बड़ा सैनिटाइजर है। अगली बार ‘सेंड’ बटन दबाने से पहले अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दें, क्योंकि अधूरा ज्ञान बांटना समाज के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है!