बॉलीवुड और साउथ सिनेमा की जंग तो पुरानी है, लेकिन इस बार ‘बाहुबली’ के खूंखार भल्लालदेव यानी राणा दग्गुबाती ने एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसने मुंबई से लेकर हैदराबाद तक हलचल मचा दी है। ‘द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया’ को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में राणा ने हिंदी और तेलुगु सिनेमा के बजट की तुलना करते हुए बॉलीवुड की दुखती रग पर हाथ रख दिया है।
पैसों की हेराफेरी या बजट की बर्बादी?
राणा दग्गुबाती सिर्फ एक बेहतरीन एक्टर ही नहीं हैं, बल्कि एक मंझे हुए प्रोड्यूसर भी हैं। सिनेमा के बिजनेस को वो नस-नस से जानते हैं। इंटरव्यू के दौरान जब उनसे हिंदी और तेलुगु फिल्मों के बजट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, “हिंदी सिनेमा में अभी भी बहुत ज्यादा पैसा है।” राणा का इशारा साफ था कि बॉलीवुड में फिल्मों पर पैसा तो पानी की तरह बहाया जाता है, लेकिन क्या उसका सही इस्तेमाल होता है? यह एक बड़ा सवाल है।
राणा ने आगे समझाया कि तेलुगु सिनेमा में हर एक पाई का हिसाब रखा जाता है। वहां बजट का बड़ा हिस्सा स्क्रीन पर दिखने वाली भव्यता और कहानी को मजबूत बनाने में खर्च होता है। वहीं दूसरी तरफ, बॉलीवुड में अक्सर स्टार्स की फीस और फालतू के तामझाम में ही बजट का एक बड़ा हिस्सा उड़ जाता है, जिससे असल कंटेंट के लिए पैसे ही नहीं बचते।
क्या तेलुगु सिनेमा है ज्यादा स्मार्ट?
राणा दग्गुबाती का मानना है कि तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री बहुत ही अनुशासित और स्मार्ट तरीके से काम करती है। वहां मेकर्स जानते हैं कि दर्शकों को क्या चाहिए और उसे बजट के दायरे में रहकर कैसे बेहतरीन तरीके से परोसा जाए। ‘बाहुबली’ और ‘आरआरआर’ जैसी फिल्मों की वैश्विक सफलता इसका जीता-जागता सबूत है कि पैसा सही जगह लगे तो इतिहास रचा जा सकता है।
राणा की यह बात बॉलीवुड के उन मेकर्स के लिए एक कड़ा सबक है जो 300-400 करोड़ रुपये पानी में बहाने के बाद भी दर्शकों को थिएटर तक खींचने में नाकामयाब हो रहे हैं। काक-वाणी का तो यही मानना है कि भाईसाहब, सिर्फ पैसा फेंकने से तमाशा अच्छा नहीं होता, तमाशे को हिट कराने के लिए दिल और दिमाग दोनों की जरूरत होती है!
अब देखना यह है कि राणा दग्गुबाती के इस कड़वे सच पर बॉलीवुड के बड़े-बड़े प्रोड्यूसर्स क्या सफाई देते हैं। क्या वे अपनी तिजोरी का सही इस्तेमाल करना सीखेंगे या फिर ‘अंधाधुंध पैसा’ बहाने का यह सिलसिला यूं ही चलता रहेगा?
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