WhatsApp यूनिवर्सिटी का नया नियम: जो फॉरवर्ड हुआ, वो सच; जो डिलीट हुआ, वो राष्ट्रद्रोह!

स्वागत है ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के नए सेमेस्टर में!

परम आदरणीय ज्ञानपिपासु पाठकों, ‘काक-वाणी’ के इस विशेष स्तंभ में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे उस महान संस्थान की, जिसने ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड जैसी पिद्दी यूनिवर्सिटीज को ज्ञान के मामले में कोसों पीछे छोड़ दिया है—जी हां, हमारी अपनी ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’। हाल ही में इस यूनिवर्सिटी के ‘सूचना और अफवाह मंत्रालय’ ने सत्यता जांचने यानी ‘फैक्ट चेक’ का एक बिल्कुल नया, क्रांतिकारी और चमत्कारी तरीका खोज निकाला है। अब आपको किसी खबर को सच मानने के लिए गूगल करने या दिमाग का इस्तेमाल करने की कतई जरूरत नहीं है।

नया पैमाना: जितने ज्यादा इमोजी, उतना बड़ा सच!

पुराने जमाने के पारंपरिक फैक्ट-चेकर्स सबूत, सूत्र और गवाह मांगते थे, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया फैक्ट-चेक अल्गोरिदम बहुत सीधा और सरल है। नए नियम के मुताबिक, अगर किसी मैसेज के अंत में कम से कम दस तिरंगे, पांच हाथ जोड़ने वाले वाले इमोजी और ‘इसे रोकें नहीं, आगे बढ़ाएं’ लिखा है, तो वह खबर शत-प्रतिशत अकाट्य सत्य है। इस सत्यता की गारंटी स्वयं नासा (NASA) और यूनेस्को (UNESCO) के वैज्ञानिक देते हैं, जो अपनी लैबोरेट्री बंद करके केवल यही जांचने में व्यस्त हैं कि भारत के किस कोने में प्लास्टिक के चावल बन रहे हैं और किस मंदिर के नीचे से सोने की गुप्त धारा बह रही है।

यूनेस्को का रोज नया ऐलान

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फैक्ट-चेक विभाग के अनुसार, यूनेस्को के पास इस समय केवल एक ही काम बचा है—हर हफ्ते भारत के राष्ट्रगान, हमारी सड़कों या हमारी सबसे सस्ती चाय को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करना। अगर आपके पास ऐसा कोई मैसेज आया है, तो कृपया उस पर संदेह करके अपनी बुद्धि का परिचय न दें। इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम में संदेह करना सीधे तौर पर ‘डिजिटल राष्ट्रद्रोह’ की श्रेणी में आता है। आखिर नासा के पास और क्या काम है, सिवाय इसके कि वह दिवाली की रात अंतरिक्ष से भारत की चमचमाती फोटो खींचे?

दौड़ेगा ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ का सिक्का

इस नए फैक्ट-चेक का सबसे अचूक हथियार है—‘Forwarded many times’ का टैग। यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलरों का मानना है कि जो झूठ दस लाख बार फॉरवर्ड हो चुका हो, वह स्वतः ही सत्य का रूप धारण कर लेता है। अंत में, सबसे बड़ा फैक्ट-चेक तो वह अंतिम चेतावनी है जो मैसेज के आखिर में छिपी होती है—”अगर इसे 11 लोगों को नहीं भेजा, तो शाम तक कोई बुरी खबर मिलेगी।” इस डर के आगे बड़े-बड़े तर्कशास्त्रियों ने घुटने टेक दिए हैं। इसलिए, दिमाग की बत्ती बुझाइए, व्हाट्सएप खोलिए और ज्ञान के इस महासागर में गोता लगाइए!

कागा जी