सिर्फ बॉलीवुड ही नहीं है भारतीय सिनेमा! अंजलि पाटिल ने ‘सेल्वी’ की सफलता पर खोला बड़ा राज

नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका आपके चहेते सिनेमाई गलियारे ‘काक-वाणी’ में। आज हम बात करने वाले हैं उस अदाकारा की, जिनकी एक्टिंग में गजब का पैनापन है और विचारों में बेबाकी। जी हां, हम बात कर रहे हैं नेशनल अवार्ड विनर एक्ट्रेस अंजलि पाटिल की। हाल ही में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में अंजलि ने कुछ ऐसा कह दिया है, जिसे सुनकर बॉलीवुड के बड़े-बड़े फिल्ममेकर्स के कान खड़े हो गए हैं।

बॉलीवुड के दायरे से बाहर निकला भारतीय सिनेमा!

अंजलि पाटिल इन दिनों अपनी फिल्म ‘सेल्वी’ के वैश्विक सफर को लेकर काफी उत्साहित हैं। इस फिल्म की ग्लोबल सक्सेस पर बात करते हुए अंजलि ने एक कड़वा लेकिन सोलह आने सच बोला है। उन्होंने कहा कि एक दौर था जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय सिनेमा की पहचान सिर्फ और सिर्फ ‘बॉलीवुड’ (हिंदी सिनेमा) तक ही सीमित थी। विदेशियों को लगता था कि भारतीय फिल्में यानी सिर्फ नाच-गाना और ड्रामा। लेकिन अब वक्त तेजी से बदल चुका है। आज दुनिया भर के दर्शक भारत की क्षेत्रीय भाषाओं और इंडिपेंडेंट (इंडी) सिनेमा को भी उतनी ही शिद्दत से देख रहे हैं और पसंद कर रहे हैं।

‘सेल्वी’ की ग्लोबल उड़ान और अंजलि का बेबाक अंदाज

फिल्म ‘न्यूटन’, ‘काला’ और ‘विथ यू विदाउट यू’ जैसी फिल्मों से अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा चुकीं अंजलि पाटिल हमेशा से लीक से हटकर काम करने के लिए जानी जाती हैं। अंजलि ने खुलासा किया कि पहले जब वे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में जाती थीं, तो लोगों की सोच बहुत सीमित थी। लेकिन अब उनकी फिल्म ‘सेल्वी’ जैसी रियलिस्टिक और सेंसिटिव कहानियों को जो ग्लोबल रिस्पॉन्स मिल रहा है, उसने पूरी धारणा को बदल कर रख दिया है। सिनेमा का यह बदलाव हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के एकाधिकार को कड़ी चुनौती दे रहा है, जो कि नए कलाकारों के लिए एक बेहतरीन संकेत है।

काक-वाणी का नजरिया: क्या सच में बदल रहा है दौर?

काक-वाणी के प्यारे पाठकों, अंजलि की इस बात में सौ प्रतिशत दम है। आज ऑस्कर के मंच पर ‘आरआरआर’ और ‘द एलिफेंट व्हिस्परर्स’ जैसी गैर-हिंदी फिल्मों का डंका बजना इस बात का सबूत है कि भारतीय सिनेमा अब सिर्फ मुंबई की फिल्म सिटी तक सीमित नहीं रहा। अब कंटेंट ही असली किंग है, चाहे वह किसी भी भाषा में हो। बॉलीवुड के मेकर्स को अब घिसे-पिटे फॉर्मूलों से बाहर निकलना ही होगा।

तो दोस्तों, अंजलि पाटिल की इस बेबाक राय पर आपका क्या सोचना है? क्या वाकई बॉलीवुड का दबदबा अब कम हो रहा है? हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं और ऐसी ही चटपटी खबरों के लिए जुड़े रहिए काक-वाणी के साथ!


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कागा जी