बंगाल की राजनीति में ‘गणित’ का नया चमत्कार: जब विपक्ष को दिखने लगे ‘जादुई आंकड़े’!

भारतीय राजनीति में ‘गणित’ एक ऐसा विषय है, जिसे समझने के लिए महान गणितज्ञों को भी दोबारा ट्यूशन लेना पड़ सकता है। हालिया चमत्कार पश्चिम बंगाल से आया है, जहां नेता प्रतिपक्ष रीताब्रत बनर्जी ने अचानक छाती ठोककर दावा कर दिया है कि ‘हमारे पास नंबर हैं!’ और उन्होंने तुरंत ‘फ्लोर टेस्ट’ की मांग कर डाली है। वाह! बंगाल की हवा में रवींद्र संगीत की जगह अब ‘विधायक-गिनती’ का सुर गूंजने लगा है।

जादुई नंबरों का यह अनोखा खेल

राजनीति के इस मौसम में ‘नंबर’ होना और ‘नंबर’ दिखाना, दोनों दो अलग-अलग कलाएं हैं। रीताब्रत जी का दावा है कि उनके पास जादुई आंकड़ा मौजूद है। अब यह आंकड़ा उनके अपने खेमे का है, या सत्ताधारी दल के नाराज ‘दीदी-भक्तों’ का, यह तो सिर्फ वही और उनके गुप्त सूत्र ही जानते हैं। भारतीय लोकतंत्र का यह सबसे खूबसूरत नियम बन चुका है—जब भी आपको बोरियत महसूस हो, सीधे राज्यपाल के पास जाइए और कहिए, “हुजूर, जरा फ्लोर टेस्ट करवाइए, हमारे पास नंबर हैं।” जनता बेचारी महंगाई और बेरोजगारी के नंबर गिनते-गिनते थक गई है, और यहां नेताओं को अपनी कुर्सी के नंबरों की चिंता सता रही है।

रंग बदलती राजनीति और रिसॉर्ट टूरिज्म

जैसे ही बंगाल में ‘फ्लोर टेस्ट’ का नाम लिया गया, वैसे ही देश के लग्जरी रिसॉर्ट्स के मालिकों के चेहरे खिल उठे होंगे। आखिर ‘विधायक बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ का सीजन जो आने वाला है! विधायकों को बस में भरकर किसी ठंडे पहाड़ी राज्य के फाइव-स्टार होटल में भेजने की तैयारियां शुरू हो चुकी होंगी। लोकतंत्र की रक्षा करने का इससे बेहतर तरीका और क्या हो सकता है कि विधायकों को जनता से दूर, स्विमिंग पूल के किनारे रखकर ‘चिंतन-मनन’ कराया जाए? रीताब्रत बनर्जी जी के इस एक बयान ने बंगाल की सुस्त पड़ी राजनीति में नई जान फूंक दी है।

लोकतंत्र का असली ‘फ्लोर शो’

‘काक-वाणी’ का मानना है कि आजकल ‘फ्लोर टेस्ट’ दरअसल लोकतंत्र का सबसे बड़ा ‘कैबरे डांस’ बन चुका है। जहां सिद्धांतों की बलि दी जाती है, वफादारियों का मोलभाव होता है और अंत में जीत उसी की होती है जिसके पास सबसे बड़ा ‘नंबर’ (और सबसे बड़ा बजट) होता है। अब देखना यह है कि रीताब्रत बाबू का यह गणित सचमुच का है, या फिर यह सिर्फ हवा में तीर चलाकर मीडिया की सुर्खियां बटोरने का एक और नाकाम ‘पॉलिटिकल स्टंट’ है। जो भी हो, बंगाल की जनता को इस भीषण गर्मी में मुफ्त का सियासी मनोरंजन तो मिल ही गया है!


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कागा जी