पर्दे पर नफरत का तड़का? बॉलीवुड फिल्ममेकर ने खोला मोर्चा, कहा- सिनेमा में फैला ‘इस्लामोफोबिया’!

काक-वाणी के पाठकों, जरा दिल थाम कर बैठिए! बॉलीवुड में इन दिनों केवल बॉक्स ऑफिस कलेक्शन का ही पारा गरम नहीं है, बल्कि बयानों की गर्मी भी सातवें आसमान पर है। हाल ही में एक मशहूर भारतीय फिल्ममेकर ने ‘मुस्लिम नेटवर्क टीवी’ को दिए इंटरव्यू में एक ऐसा बम फोड़ा है, जिसने सिनेमाई गलियारों में हलचल मचा दी है। इस फिल्ममेकर का साफ तौर पर मानना है कि भारतीय सिनेमा में अब ‘इस्लामोफोबिया’ (Islamophobia) यानी एक खास समुदाय के प्रति नफरत और डर का माहौल तेजी से पैर पसार चुका है।

पर्दे पर विलेन की बदलती परिभाषा

याद कीजिए वह दौर जब फिल्मों में विलेन ‘गब्बर सिंह’ या ‘शाकाल’ हुआ करते थे, जिनका किसी खास मजहब से कोई लेना-देना नहीं था। लेकिन आज की Bollywood Movies का रंग-ढंग पूरी तरह बदल चुका है। फिल्ममेकर का कहना है कि अब फिल्मों में देशभक्ति दिखाने का सबसे आसान फॉर्मूला यह बन गया है कि किसी एक समुदाय को खलनायक के रूप में पेश कर दिया जाए। आंखों में सुरमा, माथे पर शिकन और हाथ में हथियार लिए मुस्लिम किरदारों को अक्सर देश के दुश्मन के रूप में दिखाया जा रहा है, जिससे दर्शकों के दिमाग पर बहुत गलत असर पड़ रहा है।

कमाई का नया फॉर्मूला या सोची-समझी साजिश?

इस इंटरव्यू में यह भी आरोप लगाया गया कि आज के दौर में कुछ फिल्ममेकर्स समाज में पहले से मौजूद पूर्वाग्रहों का फायदा उठाकर अपनी जेबें भर रहे हैं। ध्रुवीकरण करने वाली फिल्में बॉक्स ऑफिस पर करोड़ों कमा रही हैं, जिससे इस तरह के नकारात्मक कंटेंट को और बढ़ावा मिल रहा है। ‘काक-वाणी’ का मानना है कि सिनेमा समाज का आइना होता है, लेकिन जब आइने पर ही नफरत की धूल जम जाए, तो सच धुंधला दिखने लगता है।

क्या खो रही है ‘अमर अकबर एंथनी’ वाली रूह?

कभी भारतीय सिनेमा अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे के लिए जाना जाता था। ‘अमर अकबर एंथनी’ जैसी फिल्मों ने दिलों को जोड़ने का काम किया था। लेकिन आज की फिल्मों के नैरेटिव पर सवाल उठाते हुए फिल्ममेकर ने गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि अगर यह सिलसिला यूं ही चलता रहा, तो सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं बल्कि समाज को बांटने का हथियार बन जाएगा। अब देखना यह है कि इस गंभीर मुद्दे पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री खुलकर कब बात करती है या फिर सब ‘चुप्पी की चादर’ ओढ़े तमाशा देखते रहेंगे!


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कागा जी