देव की मायूसी
एक शांत और खूबसूरत गाँव में रामू नाम के एक बुजुर्ग कुम्हार रहते थे। उनके साथ उनका दस साल का पोता देव रहता था। देव का एक पैर बचपन से ही खराब था, जिसके कारण वह न तो दूसरे बच्चों की तरह दौड़-भाग कर पाता था और न ही मिट्टी के बर्तनों को आकार देने के लिए चाक चला पाता था। अक्सर गाँव के बच्चे उसका मज़ाक उड़ाते थे, जिससे उदास होकर वह कोने में बैठ जाता और खुद को कोसता रहता। उसे लगता कि वह इस दुनिया में सबसे बेकार है और किसी काम का नहीं है।
रिसते हुए घड़े का सच
एक शाम, देव को रोता हुआ देखकर रामू काका बहुत दुखी हुए। वे उसे सांत्वना देने के लिए अपने बगीचे में ले गए। वहाँ उन्होंने देव को मिट्टी का एक पुराना, दरार वाला घड़ा दिखाया। रामू काका ने कहा, “बेटा, इस घड़े को देखो। इसमें एक बड़ी दरार है। जब भी मैं कुएँ से इसमें पानी भरकर लाता हूँ, तो आधा पानी रास्ते में ही रिस जाता है। तुम्हें क्या लगता है, क्या यह घड़ा बेकार है?” देव ने सिसकते हुए कहा, “हाँ दादाजी, यह तो किसी काम का नहीं है, यह तो पानी भी ठीक से नहीं रख पाता।” रामू काका मुस्कुराए और बोले, “चलो, मेरे साथ उस रास्ते पर चलो जहाँ से मैं रोज़ पानी लाता हूँ।”
फूलों से महकता रास्ता
जब देव दादाजी के साथ रास्ते पर गया, तो उसने देखा कि पगडंडी के एक तरफ बेहद खूबसूरत और रंग-बिरंगे फूल खिले हुए थे, जबकि दूसरी तरफ पूरी तरह सूखा और बंजर था। रामू काका ने देव के कंधे पर प्यार से हाथ रखा और कहा, “बेटा, ध्यान से देखो। मुझे इस घड़े की दरार के बारे में पता था। मैंने इस कमजोरी का एक अनोखा इस्तेमाल किया। मैंने रास्ते के इस तरफ फूलों के बीज बो दिए थे। हर दिन, जब मैं कुएँ से पानी लेकर लौटता, तो इस घड़े की दरार से बूंद-बूंद पानी उन बीजों पर गिरता था। आज उसी रिसते पानी की वजह से यह रास्ता इतना सुंदर और खुशबूदार बन गया है।”
जीवन की एक नई शुरुआत
दादाजी की बात सुनकर देव की आँखों में आँसू आ गए, लेकिन इस बार वे दुःख के नहीं, बल्कि उम्मीद के आँसू थे। उसे समझ आ गया कि भगवान ने इस संसार में किसी को भी बेकार नहीं बनाया है। हमारी कमियाँ ही हमें दूसरों से अलग और खास बनाती हैं। देव ने मुस्कुराकर अपने दादाजी को गले लगा लिया। उस दिन के बाद से उसने रोना छोड़ दिया। उसने पैर की कमजोरी को भूलकर अपने हाथों की कला पर ध्यान दिया और मिट्टी की ऐसी सुंदर और सजीव मूर्तियां बनाना शुरू किया, जिन्हें देखकर पूरा गाँव दाँतों तले उंगली दबा लेता था।
कहानी से सीख
सीख: इस प्रेरणादायक कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि जीवन में कभी भी अपनी कमियों को देखकर खुद को कमतर नहीं आंकना चाहिए। हर इंसान में कोई न कोई अनोखा हुनर होता है। आवश्यकता सिर्फ इस बात की है कि हम अपनी कमजोरी को पहचानकर उसे सकारात्मक दिशा में मोड़ दें और अपनी मेहनत से संसार को महका दें।