Title: बेटी का सपना
एक छोटीसी बच्ची का नाम सोना था, उसके चेहरे पर हमेशा मुस्कुराहट रहती थी। सोना का सपना था कि वह एक दिन डॉक्टर बनेगी। वह हमेशा अपनी बहनों के डॉक्टर प्ले सेट के साथ खेलती रहती थी।
सोना के परिवार में कोई स्कूल जाने वाला नहीं था। सोना भी अपना स्कूल छोड़ना चाहती थी लेकिन उससे उसके सपने पूरे नहीं हो पाते थे। उसके परिवार में सदियों से काम के लिए सिर्फ लड़कों को ही बुलाया जाता था। इसलिए सोना को उसकी आसमानी उड़ान उड़ने का मौका नहीं मिलता था।
एक दिन, सोना को अचानक सड़क पर अधिकारियों ने संभाला और उससे पूछा, “तुम क्या चाहती हो?” सोना ने जवाब दिया, “मैं डॉक्टर बनना चाहती हूं।” सड़क पर उस समय कुछ डॉक्टर्स आ रहे थे और अधिकारियों ने उनसे बात की।
उन्होंने सोना से कहा, “अगले हफ्ते आप अस्पताल में एक दिन के लिए डॉक्टर के रूप में काम करेंगी।” सोना ने खुशी से ठुमके लगाए और अपने मन में अपना सपना देखा कि उसकी डॉक्टर बनने की ताकत है।
अगले हफ्ते, सोना ने अस्पताल में डॉक्टर के रूप में काम करना शुरू किया। उसे दर्द का सामना करना पड़ा, उसने विभिन्न रोगियों की देखभाल और सहायता की। उसका उधम हिम्मती और प्रेरणादायक लगा। सोना ने अधिक से अधिक लोगों के सहयोग से इससे उदाहरण लेते हुए, अपने सपने को पूरा करने के लिए तत्पर रही और अपने लक्ष्य को हासिल करने के सफर की शुरुआत की।
सोना ने अपनी पढ़ाई जारी रखी, उसने नहीं छोड़ा, उसने अपना काम खुमरियापुर के एक अस्पताल में डॉक्टर के रूप में शुरू किया। उसने 5 साल में डिग्री हासिल की और फिर उसने न्यूयॉर्क के एक बड़े अस्पताल में नौकरी पाई।
यहीं से सोना का एक नया सफर शुरु हुआ। उसने एक संगठन में शामिल होकर, अकेली माता-पिता से वंचित बच्चों की मदद करने के लिए एक कार्यक्रम आयोजित किया। उसने बहुत सारे हिस्सेदारों को जोड़ा और बेहतर जीवन के लिए सहायता दी।
पिछले कुछ सालों में, सोना ने अपना सपना नहीं पूरा ही किया है, बल्कि वह उत्तराखंड में एक अस्पताल चला रही है जिसमें 20 बिस्तर हैं। इसके अलावा, उसने अपनी आय का 50 प्रतिशत बच्चों की सहायता में खर्च करने का वादा किया है। उसकी तरह प्रेरित होकर, कई लोग अभी भी सोना जैसे सपनों को अपने जीवन में पूरा करने के सपने देखते हैं।