ड्रैगन के घर में तांक-झांक: जब पूर्व राजनयिक ने दी मुफ्त की सलाह

पूर्व विदेश सचिव विजय गोखले साहब ने देश के बौद्धिक जगत में एक नया विमर्श छोड़ दिया है। उनका कहना है कि भारत को चीन की घरेलू राजनीति का गहराई से अध्ययन करना चाहिए। वाह! क्या अद्भुत और क्रांतिकारी विचार है। लेकिन गोखले साहब शायद यह भूल गए कि हमारे देश में ‘अध्ययन’ और ‘शोध’ का मतलब सिर्फ विरोधियों की पुरानी सोशल मीडिया पोस्ट ढूंढना और चुनाव से ठीक पहले जातिगत समीकरणों को रटना है। भला हमारे नेता चीन की राजनीति क्यों पढ़ें? क्या वहां कोई ऐसा राज्य है जहां अगले महीने चुनाव होने वाले हैं और हमारे स्टार प्रचारकों को वहां जाकर रैलियां करनी हैं?

शी जिनपिंग की पाठशाला और हमारे चुनावी शूरवीर

चीन की घरेलू राजनीति में पढ़ने जैसा आखिर है ही क्या? वहां तो एक ही पार्टी है, एक ही नेता है और वही आजीवन राजा है। हमारे नेताओं को तो इस व्यवस्था से जलन (और थोड़ी बहुत हमदर्दी) होनी चाहिए, अध्ययन नहीं! हमारे लोकतंत्र की खूबसूरती तो देखिए, यहां सुबह उठकर पहले यह देखना पड़ता है कि कौन सा विधायक किस रिसॉर्ट में चाय पी रहा है और शाम तक वह किस दल का ‘गंगाजल’ छिड़क कर शुद्ध हो चुका है। चीन में तो ‘विपक्ष’ नाम का प्राणी केवल इतिहास की किताबों में मिलता है। हमारे नेता तो सोच रहे होंगे कि काश! यह चीनी फॉर्मूला हमें भी मिल जाता, तो रोज-रोज टीवी स्टूडियो में बैठकर गला फाड़ने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

बिना ‘मुफ्त की रेवड़ी’ के सरकार कैसे चलती है?

अगर हमारे रणनीतिकार चीन की घरेलू राजनीति पढ़ने बैठ भी गए, तो उन्हें भारी निराशा हाथ लगेगी। वे सोचेंगे कि बिना किसी मुफ्त बिजली-पानी के वादे के, बिना धर्म और जाति के नाम पर वोट मांगे, कोई सरकार भला दशकों तक सत्ता में कैसे रह सकती है? हमारे देश में तो एक छोटा सा पुल बनाने के लिए भी चार बार नारियल फोड़ना पड़ता है और छह बार उसका श्रेय लेने के लिए पोस्टर छपवाने पड़ते हैं। चीन वाले चुपचाप रातों-रात पूरा अस्पताल खड़ा कर देते हैं और किसी को ‘धन्यवाद मोदी जी’ या ‘धन्यवाद विपक्ष’ का बैनर लगाने का मौका भी नहीं मिलता। भला ऐसी ‘बोरिंग’ राजनीति का अध्ययन हमारे उत्साही राजनेता क्यों करेंगे?

अंत में, ‘काक-वाणी’ का तो यही मानना है कि गोखले साहब की सलाह हवा में तीर चलाने जैसी है। जब तक चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में ‘टिकट बंटवारे पर घमासान’ नहीं होता और वहां की सड़कों पर चुनावी रैलियों के कारण ट्रैफिक जाम नहीं लगता, तब तक हमारे नीति-निर्माताओं को ड्रैगन के घर में झांकने का कोई फायदा नजर नहीं आने वाला। हमें चीन की राजनीति नहीं, बल्कि चीन को हमारी राजनीति सीखनी चाहिए ताकि उन्हें पता चले कि असली मनोरंजन किसे कहते हैं!


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कागा जी