WhatsApp यूनिवर्सिटी के ‘परम ज्ञानी’ और उनके ऐतिहासिक अविष्कार

भारत में एक ऐसी यूनिवर्सिटी है जिसके कैंपस का कोई पता नहीं है, लेकिन इसके छात्रों और प्रोफेसरों की संख्या करोड़ों में है। जी हां, हम बात कर रहे हैं हमारी अपनी ‘WhatsApp यूनिवर्सिटी’ की। यहाँ रोज सुबह चाय की चुस्की के साथ ज्ञान की ऐसी गंगा बहती है, जिसमें बहकर अच्छे-भले तर्कशील इंसान की बुद्धि भी घुटनों के बल आ जाती है। आज ‘काक-वाणी’ के इस विशेष अंक में हम करेंगे कुछ ऐसे ही ‘क्रांतिकारी’ दावों का सचित्र और लिखित पोस्टमार्टम।

दावा नंबर 1: यूनेस्को द्वारा घोषित ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ’ सब कुछ

इस यूनिवर्सिटी के अनुसार, यूनेस्को (UNESCO) के पास और कोई काम नहीं है सिवाय भारत की चीजों को सर्वश्रेष्ठ घोषित करने के। कभी हमारे राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे बेहतरीन राष्ट्रगान घोषित कर दिया जाता है, तो कभी दिवाली की रात नासा द्वारा ली गई भारत की वह जगमगाती (फोटोशॉप्ड) तस्वीर वायरल हो जाती है। सच तो यह है कि यूनेस्को के अधिकारियों को शायद पता भी नहीं होगा कि उनके नाम पर व्हाट्सएप ग्रुप्स में कितनी बार ‘सर्टिफिकेट’ बांटे जा चुके हैं। यूनेस्को खुद परेशान है कि वह अपनी वेबसाइट संभाले या व्हाट्सएप के दावों का खंडन करे।

दावा नंबर 2: 2000 के नोट में नैनो-जीपीएस चिप

याद कीजिए वह दौर जब 2000 रुपये के गुलाबी नोट नए-नए आए थे। व्हाट्सएप के ‘परम ज्ञानियों’ ने दावा किया था कि इस नोट में एक ऐसी ‘नैनो-जीपीएस चिप’ लगी है, जो जमीन के 120 फीट नीचे होने पर भी सिग्नल देगी। इनकम टैक्स वाले सीधे सैटेलाइट से आपके घर की तिजोरी ट्रैक कर लेंगे। विज्ञान की इस ‘अभूतपूर्व खोज’ को सुनकर न्यूटन और आइंस्टीन ने स्वर्ग में अपनी डिग्रियां सरेंडर कर दी होंगी। बाद में जब नोट बंद हुए, तो चिप ढूंढने वाले आज भी अपने नोटों को फाड़कर उसमें से सिम कार्ड खोज रहे हैं।

दावा नंबर 3: लहसुन, प्याज और नींबू से हर बीमारी का अंत

कैंसर हो, कोरोना हो या दिल की बीमारी, व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ‘पारंपरिक वैद्यों’ के पास हर मर्ज का इलाज लहसुन, प्याज और नींबू के काढ़े में है। डॉक्टरों की सालों की पढ़ाई और करोड़ों की रिसर्च एक तरफ, और दूर के मौसा जी द्वारा फॉरवर्ड किया गया ‘बिना डॉक्टर के इलाज’ वाला मैसेज एक तरफ। इस मुफ्त के ज्ञान के चक्कर में कई लोगों ने अपने पेट को ही आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का कबाड़खाना बना लिया है।

निष्कर्ष: फॉरवर्ड का बटन दबाने से पहले रुकें

‘काक-वाणी’ का स्पष्ट संदेश है: व्हाट्सएप पर आए हर ‘चमत्कारी’ ज्ञान को सीधे दिमाग में उतारने से पहले थोड़ा सोचें। हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती और हर ‘Forwarded Many Times’ लिखा हुआ मैसेज सच नहीं होता। अपने अंगूठे को थोड़ा आराम दें, तर्क का इस्तेमाल करें और इस डिजिटल कचरे को आगे बढ़ाने के बजाय डिलीट करना सीखें।

कागा जी