ट्रम्प चाचा का नया ‘टैरिफ बम’: चीन और भारत पर धमाके की तैयारी!

दुनिया के सबसे बड़े स्वघोषित ‘डीलमकर’ और अमेरिका के स्वयंभू रक्षक डोनाल्ड ट्रम्प के हाथ में एक नया खिलौना लग गया है। सीएनबीसी चिल्ला-चिल्ला कर कह रहा है कि ट्रम्प को चीन और भारत के खिलाफ एक घातक ‘टैरिफ हथियार’ मिल गया है। अब गंभीर पत्रकार यह सवाल पूछ रहे हैं कि “क्या वह इसका इस्तेमाल करेंगे?” अरे भाई! यह कैसा नादान सवाल है? डोनाल्ड ट्रम्प के हाथ में खुजली करने वाला टैरिफ का डंडा देकर यह पूछना कि ‘क्या वह इसे घुमाएंगे’, अपने आप में इस सदी का सबसे बड़ा चुटकुला है।

महाबली ट्रम्प का ‘टैरिफ अवतार’ और प्रेम की भाषा

डोनाल्ड ट्रम्प के लिए टैरिफ कोई आर्थिक नीति नहीं है, यह उनका पहला और सच्चा प्यार है। जब वह सुबह उठते हैं, तो शायद दर्पण देखकर खुद से कहते हैं—’आज किस पर टैक्स थोपूं?’ चीन तो वैसे भी उनके सपनों में खलनायक बनकर आता है, लेकिन हमारे प्यारे भारत को भी इस बार इस महाप्रसाद से वंचित रहने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। हम भले ही ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रम्प’ के कितने ही ढोल बजा लें, लेकिन ट्रम्प चाचा की नजरों में दोस्ती एक तरफ और अमेरिका का व्यापार घाटा दूसरी तरफ है। वह तो ऐसे ‘सच्चे यार’ हैं जो गले भी लगाते हैं और जाते-जाते जेब भी साफ कर देते हैं।

चीन की नींद हराम, भारत का ‘दिल धक-धक’

चीन के नीति निर्माता इस वक्त सिर दर्द की दवा ढूंढ रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि ट्रम्प का ‘टैरिफ कोड़ा’ सीधे ड्रैगन की पीठ पर बरसने को तैयार है। वहीं भारत के आईटी और एक्सपोर्ट सेक्टर में अभी से लोग हनुमान चालीसा का पाठ करने लगे हैं। ट्रम्प का दृढ़ विश्वास है कि दुनिया के सारे देश मिलकर मासूम और भोले-भाले अमेरिका को लूट रहे हैं। अब इस ‘महान डकैती’ को रोकने के लिए वह वैश्विक व्यापार की धज्जियां उड़ाने को तैयार हैं। चाहे इसके लिए खुद अमेरिकी उपभोक्ताओं को ही अपनी जेबें खाली करनी पड़ें, लेकिन ट्रम्प की जिद के आगे ग्लोबल इकोनॉमी की क्या बिसात!

क्या सच में चलेगा यह हंटर?

तो क्या ट्रम्प वाकई इस हथियार को चलाएंगे? बिल्कुल चलाएंगे! बिना ड्रामे और बिना हंगामे के ट्रम्प की राजनीति अधूरी है। वे पहले धमकी देंगे, फिर आधी रात को सोशल मीडिया पर दहाड़ेंगे, और अंत में ऐसा टैरिफ ठोकेंगे कि बीजिंग से लेकर नई दिल्ली तक के बाजारों में सन्नाटा पसर जाए। तो सज्जनों, अपनी आर्थिक सुरक्षा बेल्ट बांध लीजिए, क्योंकि अमेरिका के ‘टैक्स-किंग’ वापस आ रहे हैं, और इस बार उनके हाथ में सिर्फ वादे नहीं, बल्कि टैरिफ का भारी-भरकम हथौड़ा है!


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कागा जी