वाह रे कूटनीति! कल तक जो लोग ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ के ढोल पीटते-पीटते थक नहीं रहे थे, आज उनके कानों में अमेरिकी संसद (US House) ने 100% टैरिफ का ऐसा शंखनाद किया है कि सुबह की चाय का स्वाद कड़वा हो गया है। बीबीसी की ताजा खबर के मुताबिक, अगर भारत ने रूस से सस्ता तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो अमेरिका बाबू हमारे निर्यात पर सौ फीसदी का डंडा चला देंगे। इसे कहते हैं ‘सच्ची दोस्ती’ का असली अमेरिकी वर्जन, जहां प्यार की भाषा सिर्फ प्रतिबंधों से समझाई जाती है।
सस्ते तेल की ‘क्रूड’ हकीकत और विश्वगुरु का चश्मा
हमारे तेज-तर्रार विदेश मंत्री एस जयशंकर साहब ने पूरी दुनिया को पश्चिमी मंचों पर जाकर घुड़की दी थी कि ‘यूरोप की समस्याएं दुनिया की समस्याएं नहीं हैं’। बात तो सोलह आने सच थी, लेकिन वाशिंगटन के नीति-निर्माताओं को सच सुनने की पुरानी बीमारी नहीं है। भारत ने रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदा, उसे घरेलू रिफाइनरियों में साफ किया और फिर उसी तेल को ‘मेड इन इंडिया’ का ठप्पा लगाकर वापस यूरोप और अमेरिका को ही बेच दिया। आपदा को इस तरह महा-अवसर में बदलने की भारतीय क्रोनोलॉजी को अमेरिका ने शायद ज्यादा ही दिल पर ले लिया है। अब अमेरिकी सांसदों ने वोट देकर कह दिया है कि बेटा, अगर पुतिन से यारी रखोगे, तो हम तुम्हारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ पर टैक्स का ऐसा हथौड़ा मारेंगे कि कूटनीति धरी की धरी रह जाएगी।
दहशत में दिल्ली या तैयार है कोई नया ‘मास्टरस्ट्रोक’?
अब देखना यह है कि हमारे देश के टेलीविजन स्टूडियो के शेर इस पर क्या दहाड़ते हैं। क्या एस जयशंकर एक बार फिर अपनी जादुई आंखों के चश्मे को उंगलियों से ठीक करते हुए अमेरिकी पत्रकारों को अंतरराष्ट्रीय नैतिकता का पाठ पढ़ाएंगे? या फिर गोदी मीडिया इसे भी प्रधानमंत्री का एक नया ‘मास्टरस्ट्रोक’ घोषित कर देगा, जिसमें यह साबित किया जाएगा कि अमेरिका दरअसल भारत के आगे घुटने टेक चुका है और यह 100% टैरिफ तो बस भारत को आत्मनिर्भर बनाने का अमेरिकी तरीका है!
खैर, ‘काक-वाणी’ की मुफ्त सलाह यह है कि भारतीय जनता को घबराने की बिल्कुल ज़रूरत नहीं है। अगर अमेरिका ने हमारे सामान पर टैक्स लगाया, तो हम भी उनके ‘आईफोन’ और ‘स्टार्बक्स’ की कॉफी पर स्वदेशी टैक्स ठोक देंगे। वैसे भी, पतंजलि का गिलोय रस और डाबर का च्यवनप्राश पीने वाली आत्मनिर्भर जनता को वाशिंगटन के प्रतिबंधों से क्या डरना? कूटनीति चलती रहेगी, बयानबाजी गरजती रहेगी, बस देखना यह है कि इस बार ‘चाचा सैम’ को चुप कराने के लिए कौन सा नया राग अलापा जाता है!
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