व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया आविष्कार: यूनेस्को ने घोषित किया दुनिया का सर्वश्रेष्ठ ‘फॉरवर्ड’ संदेश

प्रिय देशवासियों, यदि आपके पास सुबह-सुबह “इस संदेश को 11 लोगों को भेजें, शाम तक बड़ी खुशखबरी मिलेगी” वाला संदेश नहीं आया, तो समझिए आपका दिन अभी शुरू ही नहीं हुआ है। हमारे ‘काक-वाणी’ विभाग के विशेष खोजी कौवों ने पता लगाया है कि देश में ऑक्सफोर्ड और हार्वर्ड से भी बड़ा एक ज्ञान का सागर बह रहा है, जिसे हम आदरपूर्वक ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ कहते हैं। इस विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ बिना कोई परीक्षा दिए ही लोग ‘परम ज्ञानी’ और ‘महावैज्ञानिक’ की मानद उपाधि लेकर घूम रहे हैं।

यूनेस्को और नासा का ‘व्हाट्सएप’ कनेक्शन

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के सिलेबस के अनुसार, दुनिया का हर दूसरा बड़ा फैसला यूनेस्को और नासा मिलकर ही करते हैं। कभी यूनेस्को हमारे राष्ट्रगान को दुनिया का ‘सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित कर देता है, तो कभी नासा वाले अंतरिक्ष से सूरज की आवाज में ‘ॐ’ की ध्वनि रिकॉर्ड कर लेते हैं। सच तो यह है कि फ्रांस में बैठे यूनेस्को के अधिकारियों को यह भी नहीं पता होगा कि वे रोज सुबह भारत के कौने-कोने में व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से कितने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय सर्टिफिकेट बांट रहे हैं। इस विश्वविद्यालय के कुलपतियों का दावा है कि प्लास्टिक के चावल से लेकर पत्तागोभी में मिलने वाले अदृश्य कीड़ों तक, सब कुछ केवल इनके फॉरवर्ड संदेशों से ही ठीक हो सकता है।

विज्ञान भी पानी भरता है इस ज्ञान के आगे

यहाँ के मेडिकल साइंस का तो कहना ही क्या! कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज हमारे ग्रुप के एडमिन साहब गर्म पानी में नींबू और हल्दी निचोड़कर मात्र पांच मिनट में कर देते हैं। आधुनिक डॉक्टरों ने सालों पढ़ाई करके और करोड़ों रुपये फूंककर जो नुस्खे नहीं खोजे, वो हमारे ‘फुफा जी’ ने पारिवारिक ग्रुप में ‘फॉरवर्डेड मैनी टाइम्स’ के चमचमाते टैग के साथ मात्र दो सेकंड में खोज निकाले। इस यूनिवर्सिटी का सीधा सिद्धांत है – “तथ्य गए तेल लेने, बस उंगली चलाओ और फॉरवर्ड बटन दबाओ।” यदि आपने इस ज्ञान पर जरा सा भी संदेह जताया, तो आपको तुरंत ‘ग्रुपद्रोही’ घोषित कर दिया जाएगा।

काक-वाणी का कड़वा सच

काक-वाणी की ओर से हम बस यही कहना चाहते हैं कि इस दिव्य विश्वविद्यालय के झांसे में आने से बचें। जब भी कोई सनसनीखेज संदेश चमकीले गुलाब के फूलों के साथ आपके पास आए, तो अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करें। नासा के वैज्ञानिकों के पास वैसे ही बहुत काम हैं, और यूनेस्को रोज मुफ्त के प्रमाण पत्र नहीं बांटता। इसलिए अगली बार जब कोई चमत्कारी संदेश आए, तो उसे आगे भेजने के बजाय वहीं दफन कर दें। याद रखिए, अफवाहें फैलाने से पुण्य नहीं, सिर्फ मूर्खता का प्रसार होता है।

कागा जी